Yavatmal News: मृत समझे गए बेटे की एक साल बाद घर वापसी, नंददीप फाउंडेशन ने कराया 769वां पुनर्वास
Yavatmal Successful Rehabilitation: यवतमाल के नंददीप फाउंडेशन ने मानसिक बीमारी के कारण एक साल से लापता अर्जुनसिंह बारिया का उपचार और पुनर्वास कर उसे मध्य प्रदेश स्थित उसके परिवार से मिलाया।
- Written By: आंचल लोखंडे
मानसिक रोगी पुनर्वास- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nanddeep Foundation Yavatmal: कभी-कभी परिस्थितियां इंसान से जीने की उम्मीद भी छीन लेती हैं, लेकिन मानवता का एक हाथ किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है। ऐसी ही एक भावुक और प्रेरणादायी कहानी यवतमाल के नंददीप फाउंडेशन बेघर मनोरोगी आश्रय केंद्र ने एक बार फिर समाज के सामने प्रस्तुत की है। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के देवगढ़ (पोस्ट बागोद) निवासी अर्जुनसिंह किरपालसिंह बारिया मानसिक बीमारी के कारण लगभग एक वर्ष पहले घर से लापता हो गए थे।
परिवार ने उनकी हर संभव तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान जंगल में मिले एक अज्ञात शव की सूचना पर परिजनों को लगा कि वह अर्जुन ही है। पूरे परिवार में मातम छा गया, लेकिन बाद में शव की पहचान होने पर पता चला कि वह अर्जुन नहीं है। इससे परिवार में फिर उम्मीद की किरण जगी। इसी बीच नागपुर-तुलजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर फटे कपड़ों में, नंगे पैर और कंधे पर कपड़ों की गठरी लेकर भटक रहे अर्जुन पर जेतवन पर्यटनस्थल के गौतम बनसोड की नजर पड़ी। उन्होंने तत्काल नंददीप फाउंडेशन के संस्थापक संदीप शिंदे से संपर्क किया।
भटके कदमों को मिला घर का रास्ता
बाद में अर्जुन को सुरक्षित आश्रय केंद्र लाया गया, जहां उसकी साफ-सफाई कर नए कपड़े पहनाए गए और मनोचिकित्सक डॉ। श्रीकांत मेश्राम के मार्गदर्शन में उपचार शुरू किया गया। लगभग छह से आठ महीने तक चले उपचार, देखभाल और स्नेह के बाद अर्जुन पूरी तरह स्वस्थ होने लगा। संदीप शिंदे और नंदिनी शिंदे ने माता-पिता की तरह उसकी सेवा की। एक दिन अर्जुन ने भावुक होकर कहा, ‘मुझे घर जाना है।’ इसके बाद पुनर्वास समन्वयक निशांत सायरे ने परिवार की खोज शुरू की और आवश्यक जानकारी जुटाकर परिजनों से संपर्क स्थापित किया।
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अर्जुन की भावुक घर वापसी
23 जुलाई 2026 को निशांत सायरे और विजय कुलजरकर भारी बारिश, पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों से होकर अर्जुन को उसके गांव सुरक्षित पहुंचाने में सफल रहे। घर के आंगन में जैसे ही अर्जुन पहुंचा, उसकी मां कस्तुरीबाई दौड़कर बाहर आईं और बेटे को गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। एक वर्ष से बिछड़ा बेटा जीवित लौट आया था। चारों भाई, चारों बहनें और पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। जिसे मृत मानकर मन से विदा कर दिया था, उसके जीवित लौट आने की खुशी पूरे परिवार के लिए अविस्मरणीय बन गई।
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मध्य प्रदेश के जंगलों से यवतमाल की मदद तक
परिजनों ने नंददीप फाउंडेशन और सभी सहयोगी दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने उनके परिवार को फिर से जीवन की सबसे बड़ी खुशी लौटाई है। नंददीप फाउंडेशन बेघर मानसिक रोगियों को केवल आश्रय ही नहीं देता, बल्कि उनका उपचार, पुनर्वास और परिवार से पुनर्मिलन कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन दिलाने का कार्य भी कर रहा है। अर्जुनसिंह बारिया का पुनर्वास संस्था का 769वां सफल पुनर्वास है, जो मानवता की सेवा का एक और प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
