नए पैकेट में पुरानी चीज, Public Examinations Amendment Bill को संजय राउत ने बताया मोदी सरकार का मायाजाल

Sanjay Raut On Public Examinations Amendment Bill: लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश होने पर संजय राउत ने साधा निशाना। कहा- यह मोदी सरकार का मायाजाल और पुराना बिल है।
Sanjay Raut On Public Examinations Amendment Bill
एंटी पेपर लीक बिल पर भड़के संजय राउत (फोटो क्रेडिट-X)
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Public Examinations Amendment Bill: देश भर में NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के ऐतिहासिक आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार ने संसद में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026' पेश किया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को हंगामे के बीच इस बिल को लोकसभा के पटल पर रखा, जिसका सत्तापक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।

हालांकि, इस विधेयक के पेश होते ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे "नए पैकेट में पुरानी चीज" करार देते हुए मोदी सरकार का राजनीतिक मायाजाल बताया है।

सजा और जुर्माना बढ़ाना सिर्फ दिखावा

संजय राउत ने नए कानून पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार को लगता है कि उसने कोई बहुत बड़ा तीर मार लिया है, जबकि सच्चाई यह है कि यह पुराना ही बिल है। उन्होंने कहा कि इसमें केवल सजा के प्रावधान को 1 साल से बढ़ाकर 10 साल किया गया है और जुर्माने की राशि को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है।

राउत ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन जंतर-मंतर पर देखने को मिला, लेकिन सरकार महज कानून में फेरबदल कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

बीजेपी से जुड़े हैं पेपर लीक के तार

संजय राउत ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि देश में पेपर लीक का सबसे बड़ा रैकेट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में NEET पेपर लीक मामले में जिन लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं, वे सभी सत्ताधारी दल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर और बड़े-बड़े एजुकेशन बोर्ड्स में सरकार अपने लोगों को बैठाती है, जो आपस में मिलकर ऐसी धांधलियों को अंजाम देते हैं।

क्या हैं नए संशोधन विधेयक के मुख्य प्रावधान?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस प्रस्तावित संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना है। इसके तहत दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना और दोषियों की संपत्तियों को जब्त करने का कड़ा प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने और 3 महीने के भीतर फैसला सुनाना सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल की गई है।

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