Yavatmal News: मजदूर की मौत पर ‘मुआवज़े’ का तमाशा! मोहदा हादसा बना इंसाफ की अग्निपरीक्षा
Compensation Controversy: वणी के मोहदा गिट्टी क्रेशर हादसे में मजदूर की मौत के बाद 7 लाख मुआवज़े को लेकर विवाद गहरा गया है परिजन लापरवाही के आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mohda accident (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mohda Accident: मोहदा स्थित के.बी. खदान गिट्टी क्रेशर में 54 वर्षीय मजदूर प्रकाश सूर्यभान बांदुरकार की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यवस्था में मजदूर की जान कितनी सस्ती समझी जाती है। कन्वेयर बेल्ट में दबकर हुई इस मौत को “हादसा” कह देना आसान है, लेकिन यह लापरवाही, लालच और प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा बताया जा रहा है।
हादसे के बाद 7 लाख रुपये मुआवज़ा देने की पेशकश की गई, लेकिन परिजनों का सवाल सीधा और मार्मिक है। क्या एक इंसान की जिंदगी की कीमत सिर्फ 7 लाख रुपये है? क्या कुछ पैसों से उजड़ा हुआ घर फिर बसाया जा सकता है? क्या बच्चों के सिर से उठे पिता के साए की भरपाई संभव है? परिवार का आरोप है कि यह मुआवज़ा नहीं, बल्कि मामले को दबाने की कोशिश है। परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम होते, मशीनों पर सुरक्षा कवच लगे होते, मजदूरों को प्रशिक्षण और जरूरी सुरक्षा उपकरण दिए गए होते, तो शायद आज प्रकाश बांदुरकार जीवित होते।
व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी उजागर
स्थानीय लोगों के अनुसार, वणी क्षेत्र के अधिकांश गिट्टी क्रेशरों में सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित हैं। खुले कन्वेयर बेल्ट, बिना गार्ड के चलती मशीनें और बिना हेलमेट-दस्ताने काम करते मजदूर आम दृश्य बन चुके हैं। प्रशासन की कार्रवाई भी अक्सर हादसे के बाद ही शुरू होती है और कुछ दिनों बाद सब कुछ फिर सामान्य हो जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Yavatmal: मारेगांव साप्ताहिक बाजार में मोबाइल चोरों का आतंक, 7 फोन चोरी कर खातों से निकाले 1.07 लाख रुपये
Yavatmal में गोवंश तस्करी विवाद मे बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या, शहर बंद कर जताया आक्रोश
नगर परिषद की बड़ी कार्रवाई, यवतमाल में अतिक्रमण पर बुलडोजर, गोधनी मार्ग से 45 कब्जे हटाए
यवतमाल: पत्नी से अवैध संबंध के शक में युवक की पत्थर से कुचलकर हत्या, 12 घंटे में आरोपी गिरफ्तार
प्रकाश बांदुरकार अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी मौत ने न सिर्फ एक परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है। अब परिजन सिर्फ मुआवज़ा नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मोहदा का यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि इंसाफ की परीक्षा बन गया है। यदि इस बार भी जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुआवज़ा इस बात की मुहर होगा कि इस व्यवस्था में मशीनें ज्यादा कीमती हैं और मजदूर की जान अब भी सौदे का हिस्सा है।
अब तक 9 से 10 मजदूर गंवा चुके हैं जान
मोहदा में 20 से अधिक गिट्टी क्रेशर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन नियम-कानूनों का पालन नहीं होने की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। राजस्व, खनन और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सुरक्षा के नाम पर लापरवाही इतनी गंभीर बताई जा रही है कि पिछले 7 वर्षों में खदान पट्टों और क्रेशरों में दबकर 9 से 10 मजदूरों की जान जा चुकी है, ऐसा ग्रामस्थों का दावा है।
ये भी पढ़े: जनगणना 2026-27: ओबीसी की अलग गणना की मांग, भंडारा में ज्ञापन; संघर्ष समिति ने उठाए सवाल
हर बार मुआवज़ा देकर मामला शांत कर दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी क्रेशर मालिक के खिलाफ ठोस मामला दर्ज नहीं हुआ है। मृतक प्रकाश बांदुरकार की दर्दनाक मौत के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में थानेदार संतोष मनवर के मार्गदर्शन में शिरपुर पुलिस क्या कार्रवाई करती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
(इनपुट: सागर बोढे)
