MSP paddy procurement (सोर्सः सोशल मीडिया)
Farmers Protest Lakhandur: न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत खरीदे गए खरीफ धान के बकाया भुगतान और अन्य लंबित मांगों को लेकर शुरू किया गया अनशन प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। जिला पणन विभाग की ओर से मांगों पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलनकारियों ने 6 फरवरी को अपना अनशन वापस ले लिया।
इस वर्ष जिले में धान खरीदी के लिए 252 केंद्र मंजूर किए गए थे, जिनके माध्यम से अब तक 748.98 करोड़ रुपये मूल्य के 31.53 लाख क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। अकेले लाखांदुर तहसील में 52 केंद्रों पर 17,744 किसानों से 6.42 लाख क्विंटल धान खरीदा गया। हालांकि, पिछले तीन महीनों से तहसील के किसानों का लगभग 152.09 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया होने के कारण वे भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। लक्ष्य समाप्त होने के कारण करीब 7,000 किसानों की धान खरीदी भी अधर में लटक गई थी।
किसानों की समस्या को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के तहसील प्रमुख विनोद ढोरे और रयत किसान संगठन के तहसील अध्यक्ष ज्ञानेश्वर राउत ने 5 फरवरी से स्थानीय शिवाजी टी-प्वाइंट पर अनशन शुरू किया था। प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए जानकारी दी कि सरकार से 25 दिसंबर तक खरीदे गए धान के लिए 445.98 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है, जिसे किसानों के बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पणन विभाग ने स्पष्ट किया कि जिले में इस वर्ष 64 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें से आधी खरीदी पूरी हो चुकी है। शेष धान की खरीदी के लिए सरकार से अतिरिक्त 25 लाख क्विंटल के लक्ष्य की मंजूरी मांगी गई है। मंजूरी मिलते ही बाकी धान की खरीदी भी सुचारू रूप से शुरू कर दी जाएगी।
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जिला पणन विभाग के सहायक पणन अधिकारी बी.आर. बजगुड़े, तहसीलदार वैभव पवार और थानेदार सचिन पवार की उपस्थिति में अनशनकारियों को नींबू पानी पिलाकर आंदोलन समाप्त कराया गया। इस अवसर पर ज्ञानेश्वर राउत, रामचंद्र राउत सहित बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद थे।