
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bhandara OBC Population Count Demand: भंडारा देश में आगामी 1 अक्टूबर 2026 और 1 मार्च 2027 से जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस जनगणना में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की भी स्वतंत्र जनगणना कराए जाने की मांग को लेकर ओबीसी संघर्ष समिति की ओर से जिलाधिकारी भंडारा के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।
प्रश्नावली की खामियों पर आपत्ति केंद्र सरकार द्वारा 22 जनवरी को जनगणना को लेकर अधिसूचना जारी की गई है, जिसके अनुसार जनगणना में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। समिति ने आपत्ति जताई है कि जहां अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए अलग कॉलम दिया गया है, वहीं ओबीसी वर्ग के लिए कोई स्वतंत्र कॉलम नहीं रखा गया है। प्रश्न क्र. 12 में केवल एससी या एसटी होने की जानकारी मांगी जाएगी, जबकि ओबीसी का कोई उल्लेख नहीं है।
इससे ओबीसी समाज की वास्तविक संख्या और स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाएगी, ऐसा समिति का कहना है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला : ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 1881 से 1931 तक देश में जातिवार जनगणना होती थी, उस समय ओबीसी की संख्या लगभग 52 प्रतिशत पाई गई थी।
लेकिन 1951 के बाद केवल अनुसूचित जाति और जनजाति की अलग गणना की जाती रही और ओबीसी की गणना बंद कर दी गई। इसके चलते इस वर्ग के विकास के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं हो पा रहा है। कालेलकर आयोग, मंडल आयोग और नच्ची अप्पन समिति ने भी ओबीसी की अलग जनगणना की सिफारिश की है।
आँधीसी वर्ग की अलग गणना होने से इस समाज की शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शासन-प्रशासन में ओबीसी का प्रतिनिधित्व, उच्च शिक्षित युवाओं और बेरोजगारों की वास्तविक संख्या सामने आएगी, समिति का कहना है कि संख्या स्पष्ट हुए बिना आरक्षण के लाभ और विकास नीतियां तय करना संभव नहीं है।
समिति ने मांग की है कि जनगणना के फॉर्म में तत्काल संशोधन कर ओबीसी के लिए स्वतंत्र कॉलम जोड़ा जाए, यदि यह मांग पूरी नहीं की गई, तो सम्पूर्ण ओबीसी समाज जनगणना का बहिष्कार करेगा, ऐसी चेतावनी भी दी गई है।
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यह ज्ञापन सौंपते समय मुख्य समन्वयक सदानंद इलमे, प्रभाकर वैरागडे, रमेश शहारे, संजय मते, बालकृष्ण सार्वे, रोशन उरकुडे सहित भगिरथ धोटे, मोरेश्वर तिजारे, दिनकर काटेखाये, रोशन जांभुलकर, किशोर डोकरीमारे, राजेश मडाम, रामलाल बोदे और विष्णू जगनाडे उपस्थित थे।






