ग्वाला बना मनसे नेता! आवारा पशुओं लेकर पहुंचार नगर परिषद दफ्तर, वणी में मचा बवाल
MNS Protest In Vani: यवतमाल जिले के वणी में आवारा पशुओं की समस्या पर मनसे अध्यक्ष अंकुश बोढे ने ग्वाला बनकर अनोखा आंदोलन किया। उन्होंने सभी जानवर नगर परिषद कार्यालय ले जाकर छोड़े।
- Written By: आकाश मसने
आवारा मवेशियों को ले जाते मनसे कार्यकर्ता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Yavatmal Vani News: यवतमाल जिले के वणी शहर में आवारा पशुओं की बेतहाशा आवाजाही और इससे होने वाली दुर्घटनाओं में वृद्धि से जहां नागरिक स्तब्ध हैं, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस गंभीर समस्या की लगातार अनदेखी कर रहे नगर परिषद प्रशासन को करारा सबक सिखाया है।
मनसे के वणी शहर अध्यक्ष अंकुश बोढे ने 21 अगस्त को एक अनूठा और अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन करते हुए ग्वाला बनकर शहर के सभी आवारा पशुओं को इकट्ठा करके नगर परिषद कार्यालय ले गए और उन्हें छोड़ दिया। इस अनूठे आंदोलन से नगर परिषद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और शहर में इस विरोध प्रदर्शन की जोरदार चर्चा हो रही है।
पिछले कई दिनों से आवारा पशुओं के कारण शहर की मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित है और कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। मनसे द्वारा समय-समय पर प्रशासन को इस समस्या का तत्काल समाधान निकालने के लिए ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।
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मनसे ने किया अनोखा विराेध प्रदर्शन
मनसे ने प्रशासन को उनकी गैरजिम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए यह विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। मनसे शहर अध्यक्ष का ‘ढोरकी’ अवतार ढोल-नगाड़ों की ध्वनि के साथ नगर परिषद पहुंचा।
आज नगर अध्यक्ष अंकुश बोढे ने स्वयं ग्वाला का वेश धारण किया। उनके साथ बड़ी संख्या में मनसे पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने मिलकर शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को इकट्ठा किया। पशुओं को भगाते हुए व ढोल-नगाड़े बजाते हुए नगर परिषद पहुंचे।
अचानक पशुओं के झुंड और उनके पीछे नारे लगाते मनसे कार्यकर्ताओं को देखकर नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी असमंजस में पड़ गए। मनसे कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद परिसर में नारेबाजी कर प्रशासन का विरोध किया। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया और अंततः मुख्य अधिकारी सचिन गाडे को स्वयं आंदोलनकारियों से मिलने बाहर आना पड़ा।
5 दिनों में समस्या का समाधान करने का वादा!
मनसे के इस आक्रामक रुख के चलते, मुख्य अधिकारी सचिन गाडे ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मनसे प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि शहर के कांजीहाउस और उपलब्ध गौशालाओं की क्षमता की जांच के बाद, अगले पांच दिनों में सभी आवारा पशुओं को वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा। मुख्याधिकारी के इस आश्वासन के बाद मनसे ने आंदोलन वापस ले लिया।
ज्ञापन सौंपते मनसे कार्यकर्ता (सोर्स: सोशल मीडिया)
कई बार समस्याओं को लेकर लिखा पत्र
मनसे शहर अध्यक्ष अंकुश बोढे ने कहा कि अब से हम शहर में आवारा पशुओं, कुत्तों और सूअरों को मुख्याधिकारी कार्यालय में लाकर छोड़ेंगे। हमने शहर में आवारा पशुओं, कुत्तों और सूअरों पर नियंत्रण के लिए नगर परिषद को बार-बार पत्र लिखा है।
हालांकि, मुख्य अधिकारी इन पत्रों को कचरे की टोकरी दिखाने का काम किया है। इसलिए, आज आखिरकार यह आंदोलन किया। अगर इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हम शहर के सभी आवारा जानवरों, कुत्तों और सूअरों को मुख्य अधिकारी के कार्यालय में लाकर छोड़ देंगे।
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इस आंदोलन में मनसे तहसील अध्यक्ष फाल्गुन गोहोकर, धीरज पिदुरकर, शंकर पिंपलकर, मयूर गेडाम, मयूर घाटोले, गोविंदराव थेरे, रमेश पेचे, लकी सोमकुंवर, जुबैर खान, योगेश तड़म, हीरा गोहोकर, अहमद रंगरेज़, अक्षय बोकड़े, गौरव पूरनकर, सूरज पलास्कर, वैभव पूरनकर, कृष्णा नीमसाटकर, मनीषा नवघरे, हर्षल दांडेकर, कन्हैया पोद्दार, साहिल येरणे, सूरज कोंधे सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। मनसे के इस ‘ढोरकी’ आंदोलन ने प्रशासन समेत पूरे शहर का ध्यान खींचा है और अब ग्रामीण प्रशासन की आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
