डिजिटल इंडिया फेल (AI Generated image)
MahaNet Internet Failure: यवतमाल जिले में विकसित भारत की कल्पना तभी पूरी हो सकती है जब आधुनिक सुविधाएं गाँव-ग्रामीण इलाकों तक पहुंचें। लेकिन डिजिटल इंडिया के दावों के बावजूद जिले के गांवों में इंटरनेट सुविधा का न होना एक गंभीर वास्तविकता है। यवतमाल जिले में 2000 से अधिक गांवों का प्रशासन 1200 से अधिक ग्रामपंचायतों के माध्यम से होता है।
हाल ही में कुछ नई पंचायतों का भी गठन हुआ है। सरकार बार-बार घोषणा करती रही कि इन पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। महानेट के माध्यम से ग्रामपंचायतों को इंटरनेट सुविधा प्रदान की जा रही है। लेकिन इसमें 1203 ग्रामपंचायतों को ही शामिल किया गया है।
इनमें से भी केवल 80 पंचायतों तक ही इंटरनेट सुविधा पहुँच पाई है और गंभीर यह है कि इनमें से कई पंचायतों में ‘राउटर डाउन’ की समस्या के कारण इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वर्तमान में केवल 65 ग्रामपंचायतों में इंटरनेट सुचारू रूप से चल रहा है। घाटंजी, महागाव, मारेगाव, पुसद, रालेगाव, उमरखेड, वणी आदि तहसील की पंचायतों को ‘राउटर डाउन’ के कारण इंटरनेट से वंचित रखा गया है।
वहीं यवतमाल पंचायत समिति के अंतर्गत भारी, चापडोह, धानोरा, डोरली, मडकोना, रातचांदना, सावरगड, केलापुर पंचायत समिति के अंतर्गत अकोली बुद्रूक, मांगुर्डा, तेलटाकली, मुंझाला, साखरा, पढ़ा, गोधरा, वाघोली, जलका, सोनुर्ली, सिंगलदीप, ताडउमरी, कोंढी, धारणा, करंजीरोड, पिंपरीरोड, कोंघारा, उमरीरोड, सखी बुद्रूक, काठोडा आदि पंचायतें शामिल हैं।
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| तहसील | पंचायतें (ग्रामपंचायत) |
|---|---|
| आर्णी | 08 |
| दारव्हा | 14 |
| दिग्रस | 13 |
| केलापुर | 22 |
| यवतमाल | 08 |
| कुल | 65 |
ग्रामपंचायतों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए फाइबर केबल बिछाई गईं। लेकिन कई गांवों में जलजीवन मिशन के काम और निर्माण विभाग द्वारा खोदाई के दौरान ये केबल टूट गईं। इस वजह से कई पंचायतें अब भी इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं।