विधायक संजय देरकर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Government Fund Release Delay: राज्य में विधायकों की स्थानीय विकास निधि (एमएलए फंड) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। काग़ज़ों में हर विधायक को अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए सालाना 5 करोड़ रुपये देने की योजना मौजूद है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है। चालू आर्थिक वर्ष लगभग समाप्ति की ओर है, इसके बावजूद अधिकांश विधायकों को अब तक यह निधि मिला ही नहीं है। नतीजा साफ है।
विकास की रफ्तार थम चुकी है और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। मौजूदा स्थिति में केवल दो महीने छह दिन का समय शेष बताया जा रहा है।ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर आख़िरी वक्त में फंड जारी भी कर दिया गया, तो क्या इतने कम समय में गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य पूरे हो सकेंगे? या फिर जल्दबाज़ी में अधूरे और घटिया काम करवा कर सिर्फ़ काग़ज़ी पूर्ति की जाएगी?
विधायकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सरकार की इस लापरवाही और देरी से विकास प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई है। ग्रामीण इलाकों में छोटी-छोटी लेकिन ज़रूरी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे से जुड़े काम अटके पड़े हैं। जनता के बीच भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। आम लोग पूछ रहे हैं कि जब बजट में प्रावधान है, प्रशासनिक मंजूरी है, तो फिर पैसा आखिर कहां अटका है?
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वणी के विधायक संजय देरकर ने कहा वणी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय विकास निधि के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस निधि के माध्यम से सड़क, जलपूर्ति, नालियों, विद्युत व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को गति दी जाएगी।
क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी हिस्सों में बुनियादी सुविधाओं की मजबूती सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास कार्यों का चयन जनता की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। निधी मिलने के बाद विकास कार्यों की शुरुआत की जाएगी। स्थानिय विकास निधी से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।