कोयले की धूल से फसल बर्बाद (सौजन्य-नवभारत)
Deoli Wardha News: देवली रेलवे स्थानक परिसर में शुरू कोयला डंपिंग यार्ड से किसानों की खेती बंजर होने का खतरा निर्माण हो गया है। वर्तमान समय में कोयले की धूल के कारण से हजारों एकड़ जमीन की फसल बर्बाद होने की कागार पर है। निर्माण हुई इस स्थिति की वजह से किसान चिंतित होकर आंदोलन करने की तैयारी में है।
देवली रेलवे स्थानक परिसर को खेत जमीन लगकर है। रेलवे कोयला डंपिंग यार्ड से निकलने वाला विषैला धुआं दिघी, बोपापुर, नारायणपुर, आजंति, सेलसुरा, चिकणी, जामणी, पडेगांव, सोनेगांव, निमगांव, दिघी, बोपापुर परिक्षेत्र के खेत पर हो रहा है। रेलवे के व्यागन से कोयला खाली करते समय टिप्पर द्वारा वाहनों में भरते समय बड़े पैमाने पर धूल होता है। वहां से यह धूल परिसर के खेतों में फैल रहा है।
फसल बचाने के लिए धुएं का बंदोबस्त करना जरूरी है। धुएं से संपूर्ण शहर परिसर प्रदूषण की चपेट में आ गया है। इसके पहले एमआईडीसी की कंपनी से निकलने वाले धुएं से जनता परेशानी झेल रही है। अब कोयले की धूल से समस्या अधिक विकट हो रही है। एमआईडीसी से होने वाले प्रदूषण के बारें में निरंतर शिकायत करने के बावजूद भी प्रदूषण महामंडल द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे नागरिकों में रोष बढ़ रहा है।
देवली से दिघी, बोपापुर, चिखली, सरूड इन गावों में जाने के लिए रेलवे स्थानक के पास से ही रास्ता है। इस डंम्पिंग यार्ड के कोयले की बड़े पैमाने पर टिप्पर से एमआईडीसी स्थित प्लैंट पर ढुलाई होती है। ओवरलोड टिप्पर को ढका नहीं जाता है।
जिससे टिप्पर के पिछे से धुआं मार्गों पर फैलने से दुपहिया चालकों के आंखों में जाता है। इतना ही नहीं तो मार्गों पर गढ्ढे निर्माण हो गए है। जिससे दुर्घटना का प्रमाण बढ़ गया है। यातायात परिवहन अधिकारी द्वारा इस समस्या की ओर ध्यान देकर निराकरण करने की मांग की जा रही है।
कोयले की ढुलाई करते समय ढकना चाहिए, डंपिंग यार्ड के चारों ओर दिवारे तैयार कर उपाययोजना करना जरूरी है। लेकिन इस ओर अनदेखी की गई है। प्रदूषण तत्काल बंद करें।
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गत कुछ वर्ष में अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ, आंखों से जुड़ी बीमारियां आदि शिकायत लेकर आनेवाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई हैं। कोयले से निकलने वाले घातक कार्बन मोको ऑक्साइड का यह परिणाम है। इससे लंग कैन्सर होने का खतरा रहता है। समस्या पर ध्यान देकर उपाययोजना करें.
कोयले की धूल फसल पर जमा हो रही है। जिसकी वजह से फसल बढ़ ही नहीं रही है। खेत के नुकसान के लिए कोयले की ढुलाई में बरती जा रही लापरवाही कारण बन रही है।
इस क्षेत्र में पशुओं की चराई के दौरान पेट में कोयले के कण जा रहे हैं। जिसकी वजह से पशुओं का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जानवरों के दूध देने की क्षमता पर परिणाम होकर पशुपालन के व्यवसाय में दिक्कत में आ रही है।
– नवभारत लाइव पर वर्धा से समीर शेख की रिपोर्ट