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मांडवी ग्रामीण अस्पताल में सामान्य प्रसव के बाद 22 वर्षीय पायल पेंदोर की अत्यधिक रक्तस्त्राव के चलते मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार, प्रसव के बाद करीब तीन घंटे तक रक्तस्त्राव होने के बावजूद आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया।
भीमराव केराम ने जिला शल्य चिकित्सक, नांदेड़ को पत्र लिखकर चिकित्सा अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
Mandvi Rural Hospital: यवतमाल जिले के किनवट तहसील के ग्राम मांडवी स्थित स्व। बलीराम पाटिल शासकीय ग्रामीण अस्पताल में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव के चलते सोनी उर्फ पायल प्रवीण पेंदोर (22) की हुई। इस मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नवजात शिशु के जन्म से परिवार में खुशियों का माहौल था, वहीं दूसरी ओर उसी बच्चे के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया।
इस हृदयविदारक घटना को गंभीरता से लेते हुए विधायक भीमराव केराम ने जिला शल्य चिकित्सक, नांदेड़ को पत्र लिखकर मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर को सुबह 5 बजे पायल का मांडवी ग्रामीण अस्पताल में सामान्य प्रसव हुआ था।
उसने 3 किलो 200 ग्राम वजन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि प्रसव के बाद करीब तीन घंटे तक लगातार रक्तस्त्राव होने के बावजूद उसे समय पर आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया। सुबह 8 बजे उसे आगे के उपचार के लिए यवतमाल रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि गर्भाशय में गर्भनाल का हिस्सा रह जाने के कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव हुआ। उपचार के दौरान पायल की मौत हो गई।
प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव को नियंत्रित करने के लिए यदि समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो क्या पायल की जान बचाई जा सकती थी? यह सवाल अब उसके परिवार के साथ ही पूरे क्षेत्र के नागरिकों को भी झकझोर रहा है। सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को प्रसव जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया के दौरान भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता की गंभीरता से समीक्षा करना आवश्यक हो गया है। विधायक केराम ने संबंधित चिकित्सा अधिकारियों, नर्सों और कर्मचारियों की भूमिका, उपचार संबंधी रिकॉर्ड, रक्तस्त्राव को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि चिकित्सा लापरवाही या कर्तव्य में चूक सामने आती है, तो संबंधितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
विधायक भीमराव केराम ने कहा 'एक मां की जान जाने के बाद जांच होना महत्वपूर्ण है, लेकिन भविष्य में किसी अन्य मां की जान न जाए, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में ठोस बदलाव करना उससे भी अधिक जरूरी है। पायल की मौत की गहन जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं को सुरक्षित प्रसव का अधिकार वास्तव में मिलना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने मांडवी ग्रामीण अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारियों, आवश्यक उपकरणों, दवाइयों और आपातकालीन उपचार सुविधाओं की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। गंभीर मरीजों के लिए सक्षम एम्बुलेंस और प्रभावी रेफरल व्यवस्था शुरू करने पर भी जोर दिया है। महाराष्ट्र के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को आदिलाबाद स्थित रिम्स अस्पताल में बिना किसी बाधा के उपचार मिल सके, इसके लिए सरकार को संबंधित प्रणालियों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए।