पंचायत समिति महागांव (सौजन्य-नवभारत)
Yavatmal Politics News: महागांव संभाग की स्थानीय पंचायत समिति के नए प्रशासनिक भवन के भूमिपूजन समारोह को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लगभग 3 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इस इमारत के भूमिपूजन कार्यक्रम में अधिकृत शासकीय आमंत्रण पत्र जारी न होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हंगामा मच गया है। चर्चा है कि इसी कारण मंत्री का प्रस्तावित दौरा भी रद्द हो गया।
वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया, जिससे पूरे कार्यक्रम में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। सूत्रों के अनुसार पंचायत समिति इमारत का भूमिपूजन कार्यक्रम जल्दबाज़ी में आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा है कि “जल्दबाज़ी में नारियल तोड़कर” औपचारिकता पूरी कर दी गई। पत्रकारों को भी आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिए जाने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे अधिक नाराज़गी इस बात को लेकर जताई जा रही है कि निमंत्रण पत्र पर जिले के पालकमंत्री संजय राठोड का नाम और फोटो नहीं था। साथ ही हिंगोली के सांसद नागेश पाटील और वाशिम के सांसद संजय देशमुख का भी उल्लेख नहीं किया गया, जबकि महागांव क्षेत्र दोनों संसदीय क्षेत्रों में विभाजित माना जाता है। कुल मिलाकर सरकारी राजशिष्टाचार की धज्जियां उड़ती नजर आईं।
इससे राजनीतिक असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम के आयोजन में स्थानीय विधायक किसन वानखेड़े तथा भाजपा पदाधिकारी नितीन भुतड़ा के स्तर पर समन्वय की कमी दिखाई दी। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई अधिकृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
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3 करोड़ 42 लाख रुपये की निधि को जिला परिषद सहायक अनुदान से मंजूरी मिलना, अधिकृत शासकीय पत्रिका जारी न होना, प्रशासन की ओर से सूचना आदान-प्रदान का अभाव, राजनीतिक दल की ओर से निमंत्रण पत्र जारी किया जाना, कार्यक्रम की आधिकारिकता पर सवाल, पालकमंत्री संजय राठोड का नाम और फोटो पत्रिका में नहीं होने से कार्यकर्ताओं में नाराज़गी, सांसद नागेश पाटील व संजय देशमुख की अनदेखी, समय पर मंत्री का दौरा रद्द होने की चर्चा और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार, राष्ट्रवादी कांग्रेस व शरद पवार गुट का बहिष्कार, जल्दबाज़ी में भूमिपूजन, पत्रकारों को निमंत्रण न देना और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न आदि वजहों से यह कार्यक्रम विवादों में रहा।
सरकारी विकास कार्यों को लेकर श्रेय लेने की होड़ ने एक बार फिर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को उजागर किया है। भूमिपूजन का यह विवाद स्थानीय राजनीति में आने वाले समय में क्या असर दिखाता है, इस ओर सभी की नजरें लगी हैं।