यवतमाल में 3500 से ज्यादा बहनें अपात्र घोषित, सरकार को भेजी रिपोर्ट, 65 वर्ष की शर्त लागू
Yavatmal News: यवतमाल जिले में अपात्र लाडकी बहिनों ने भी लाडकी बहिन योजना का फायदा उठाया। इस बात का खुलासा होने के बाद सभी का पूनर्मूल्यांकन किया गया और रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी गई।
- Written By: प्रिया जैस
लाडकी बहिन योजना (फाइल फोटो)
Ladki Bahin Yojana: यवतमाल जिले में ‘मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना में हजारों अपात्र महिलाओं ने घुसपैठ की है, यह चौंकानेवाला मामला सामने आया है। जिला परिषद प्रशासन ने हाल ही में इनका पुनर्मूल्यांकन किया, जिसमें साढ़े तीन हजार महिलाएं अपात्र पाई गईं। इनकी रिपोर्ट अब राज्य सरकार को भेज दी गई है। इस तरह अब साढ़े तीन हजार महिलाएं लाडली योजना से ‘बाहर’ होने वाली हैं।
मुख्यमंत्री लाडली बहन लोकप्रिय योजना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी। चुनावी भागदौड़ में तत्कालीन सरकार ने महिलाओं से बड़ी संख्या में आवेदन जमा करवाए थे, जिनकी ठीक से जांच भी नहीं की गई। लेकिन एक साल बाद इस योजना पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को देखते हुए, सरकार ने अपात्र लाभार्थियों की सूची जारी कर दी।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने की जांच
यह सूची संबंधित जिला परिषदों को भेजी गई और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर जाकर इसकी दोबारा जांच की गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जांच की। कुल 3,760 महिलाएं इस योजना के लिए अपात्र पाई गईं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से प्राप्त यह जानकारी अब जिला परिषद प्रशासन के पास आ गई है।
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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ की गई समीक्ष
अपात्र लाभार्थियों की सूची मिलने के बाद, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा की गई। इस समीक्षा की अंतिम रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है।
– विशाल जाधव, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यवतमाल
65 वर्ष की शर्त लागू
प्रत्येक राशन कार्ड पर कई महिलाओं के नाम थे। केवल दो को ही लाभ मिलता रहेगा, जबकि तीसरी महिला का नाम योजना से हटा दिया जाएगा। जिले में ऐसी 1,579 महिलाएं अपात्र हैं। वहीं 65 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं, जिले में अब तक ऐसी 2,182 महिलाएं लाभान्वित हो रही थीं।
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1500 की दी जा रही मदद
यवतमाल जिले में इस योजना के लिए शुरुआत में 7,19,880 आवेदन आए थे। इनमें से 6,92,563 आवेदन योग्य पाए गए, जबकि 27,317 आवेदन अपात्र पाए गए। पात्र मानी गईं 6।92 लाख महिलाओं को पिछले एक साल से 1,500 रुपये की मासिक किश्तें दी जा रही थीं। अब साढ़े तीन हजार महिलाओं को बाहर कर दिया जाएगा और उनकी 1,500 रुपये की किश्तें रोक दी जाएंगी।
