बुद्ध पूर्णिमा पर जंगल का अद्भुत अनुभव, बोर टाइगर रिजर्व में रोमांचक रात, गूंजी बाघ की दहाड़
Bor Tiger Reserve: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बोर टाइगर रिजर्व में आयोजित प्रकृति अनुभव कार्यक्रम में पर्यटकों ने जंगल की रोमांचक रात, बाघ की दहाड़ और वन्यजीवों के अद्भुत दर्शन का अनुभव किया।
wildlife tourism (सोर्स-फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Buddha Purnima Event: घने अंधेरे में जंगल से आने वाली झींगुरों की आवाजसन्नाटे को चीरती पूर्णिमा के चंद्रमा की रोशनी पानी के स्रोत के पास बनी मचान पर रात भर जागते पर्यटकों के कानों में गूंजती टिटहरी की आवाजमोरों का कलरवऔर अचानक वातावरण को कंपा देने वाली बाघ की दहाड़ ऐसा रोमांचकारी अनुभव इस वर्ष बोर टाइगर रिजर्व के प्रकृति अनुभव कार्यक्रम में पर्यटकों को मिला। विशेष बात यह रही कि इस दौरान कोर क्षेत्र के भुलाई डोह में बाघ की दहाड़ सुनाई दी।
वहीं बफर क्षेत्र के आरक्षित वन क्रमांक 260 में तेंदुए द्वारा किए गए शिकार का रोमांच भी पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय बन गया।बोर टाइगर रिजर्व की ओर से इस वर्ष 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कोर एवं बफर क्षेत्र के जल स्रोतों के पास प्रकृति अनुभव कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के लिए 130 नागरिकों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। इनमें से पूरी प्रक्रिया के बाद 74 लोगों का चयन किया गया तथा लॉटरी पद्धति से मचान निर्धारित कर पर्यटकों को वन्यजीवों के अवलोकन के लिए बैठाया गया।
सूर्यास्त के बाद जंगल में घना अंधेरा छा गया
सूर्यास्त के बाद जंगल में घना अंधेरा छा गया और वन्यजीव सक्रिय हो गए। पूर्णिमा की चांदनी जंगल के अंधेरे को चीर रही थी। इसी बीच टिटहरी, मोर, हिरण सहित विभिन्न वन्य जीवों की आवाजें मचान पर बैठे पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव बन गईं। कई पर्यटकों को भालू, तेंदुआ, सांभर, हिरण और मोर के दर्शन भी हुए।बाक्स44 मचानों से लिया प्रकृति अनुभव का आनंदबोर व्याघ्र परियोजना द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आनंद इस वर्ष 74 पर्यटकों ने कोर और बफर क्षेत्र की कुल 44 मचानों पर रात भर जागकर लिया। कोर क्षेत्र की मचानों पर इस वर्ष एक भी महिला पर्यटक शामिल नहीं थी। बोरधरण क्षेत्र में 24, न्यू बोर में 17, हिंगणी क्षेत्र में 12, बांगडापुर क्षेत्र में 16 तथा कवडस क्षेत्र में 5 पर्यटकों ने भाग लिया।
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प्राकृतिक अनुभव मिला
पर्यटक डॉ। अमोल चाफले ने कहा कि बोर व्याघ्र परियोजना के प्रकृति अनुभव कार्यक्रम में शामिल होने की मेरी लंबे समय से इच्छा थी। जो आज पूरी हुई। रोजमर्रा में हम वाहनों की आवाज सुनते हैं। लेकिन यहां पक्षियों और वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजों को करीब से अनुभव करने का अवसर मिला। जंगल और पर्यावरण का संरक्षण होना ही चाहिए।बाक्सजंगल के सौंदर्य से रूबरू हुएनागपुर के पर्यटक दिनेश हिरुडमर ने कहा कि मैं अपने बेटे के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुआ। यह अनुभव मेरे लिए अविस्मरणीय है। हमें मोर, सांभर, जंगली सूअर और भालू के दर्शन हुए। युवाओं को जंगल का महत्व समझाने के लिए मैं अपने बेटे को साथ लाया हूं।
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वन्य प्राणियों का दिदार हुआ
जिला विधि सेवा प्राधिकरण, वर्धा के सचिव विवेक देशमुख ने बताया कि मैं वर्तमान में वर्धा में कार्यरत हूं। लंबे समय से इच्छा थी कि बोर व्याघ्र परियोजना के प्रकृति अनुभव कार्यक्रम में शामिल हु। आज वह इच्छा पूरी होने से बेहद खुश हूं। हमें सांभर, नीलगाय और भालू के दर्शन हुए।
