पैनगंगा नदी से रेत की खुली तस्करी, माफियाओं को तहसील प्रशासन का संरक्षण मिलने का आरोप

Yavatmal Sand Auction Delay: हिंगनी बांध के पास पैनगंगा नदी से रेत की अवैध तस्करी की जा रही है। आरोप है की तहसील प्रशासन की मौन सहमति से प्रतिदिन 40-50 ट्रैक्टर रेत चोरी होती है।
हिंगनी बांध के पास पैनगंगा नदी से रेत की खुली तस्करी
हिंगनी बांध के पास पैनगंगा नदी से रेत की खुली तस्करी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Mahagaon Sand Mafia Issue: आरोप है कि तहसील प्रशासन की मौन सहमति से फुलसावंगी क्षेत्र में हिंगनी बांध के पास पैनगंगा नदी से प्रतिदिन 40 से 50 ट्रैक्टर रेत निकाली जा रही है। यह रेत पुसद, दारव्हा और दिग्रस क्षेत्रों में गुप्त रूप से तस्करी कर भेजी जाती है। चूंकि तालुका में रेत घाटों की नीलामी अब तक नहीं हुई है, इसलिए खनिज तस्करों को खुली छूट मिल गई है। बताया जाता है कि महागांव तहसीलदार के गुप्त लेन-देन के चलते बड़ी मात्रा में गौण खनिज संसाधनों की तस्करी जारी है, जिससे सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।

यह सवाल उठ रहा है कि महागांव तहसील प्रशासन रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? राजस्व प्रशासन तक न पहुंचने वाले तस्करों को छोड़कर कुछ चुनिंदा तस्करों पर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है, जिससे तहसील प्रशासन वरिष्ठ अधिकारियों से पीठ थपथपा रहा है। यदि महागांव तहसीलदार के ड्राइवर की कॉल डिटेल की जांच की जाए, तो तस्करों से उसके संबंध सामने आने की संभावना बताई जा रही है।

रेत तस्करी पर रोक लगाएं

इस समय ढाणकी और उमरखेड में चुनाव कार्यक्रम के चलते राजस्व प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी 19 नवंबर तक वहां तैनात हैं। इसी अवसर का फायदा उठाकर तस्कर पैनगंगा नदी से बड़े पैमाने पर रेत की चोरी कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग उठाई है कि खनन विभाग और यवतमाल जिला कलेक्टर तत्काल हस्तक्षेप कर महागांव क्षेत्र में जारी रेत तस्करी पर रोक लगाएं और राजस्व हानि को बचाएं।

जप्त रेत का भंडार गायब

पिछली बार पटवारी और मंडल अधिकारियों ने इस क्षेत्र से लगभग 71 ब्रास अवैध रेत भंडार जब्त किए थे। प्रशासन ने 400 ब्रास रेत जप्त किए जाने का दावा किया था। अब सवाल उठ रहा है कि यह जब्त की गई रेत कहां गई? जिला कलेक्टर से इस मामले की जांच कर तहसीलदारों से जवाब मांगने की मांग की जा रही है।

सरकारी राजस्व को लग रहा चूना

यवतमाल जिले में कुल 65 रेत घाट हैं। जिला प्रशासन इनमें से 33 घाटों की नीलामी कर रहा है। नीलामी न होने के कारण खनिज तस्करों को खुली छूट मिल गई है और भारी मात्रा में रेत की चोरी-छिपे तस्करी चालू है। सामान्यतः रेत घाटों की नीलामी से जिले को हर वर्ष लगभग 17 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन इस वर्ष नीलामी न होने के कारण सरकार को इस 17 करोड़ के राजस्व से वंचित रहने की आशंका जताई जा रही है।

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