NDA की आंधी के आगे अजित की 'पावर' फेल, बिहार चुनाव में NCP के 13 उम्मीदवारों की जमानत खतरे में

Ajit Pawar Bihar Election News: बिहार चुनाव में NDA प्रचंड जीत की ओर अग्रसर है, लेकिन उसके सहयोगी अजित पवार को बड़ा झटका लगा है। बिहार चुनाव में NCP का सूपड़ा साफ हो गया है।
Ajit pawars power fails in bihar-chunav-2025 against NDA's storm, security deposits of 13 NCP candidates in danger
अजित पवार (डिजाइन फोटो)
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NCP Bihar Election Result: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों में NDA प्रचंड जीत की ओर है। लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP को करारा झटका लगा है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए अकेले चुनाव लड़ने का उनका दांव पूरी तरह फेल हो गया है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना जारी है और रुझानों के मुताबिक, भाजपा नीत NDA दो तिहाई बहुमत के साथ प्रचंड जीत की ओर बढ़ रहा है। 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए 190 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि महागठबंधन 50 से भी कम सीटों पर सिमटता दिख रहा है।

इन नतीजों ने महाराष्ट्र में भी राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद, उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को बिहार में करारा झटका लगा है। बिहार में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का उनका दांव पूरी तरह से विफल रहा है, और पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है।

13 उम्मीदवारों की जमानत खतरे में

अजित पवार ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दोबारा हासिल करने के इरादे से बिहार में अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर अजित गुट एनडीए के साथ है। पार्टी ने कुल 15 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन किसी भी सीट पर बढ़त नहीं मिली। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 15 में से 13 उम्मीदवारों को इतने कम वोट मिले हैं कि उनकी जमानत जब्त होना तय माना जा रहा है। चुनाव नियमों के अनुसार, किसी उम्मीदवार को जमानत बचाने के लिए निर्वाचन क्षेत्र में कुल वैध मतों का 1/6 (यानी 16.66%) वोट मिलना अनिवार्य होता है, जिसमें बिहार में ज्यादातर एनसीपी उम्मीदवार विफल होते दिख रहे हैं।

NOTA से भी कम वोट

बिहार में एनसीपी को एक फीसदी से भी कम वोट मिलते दिख रहे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव में एनसीपी को महज 0.02 फीसदी ही वोट मिले हैं। शाम चार बजे तक एनसीपी को सिर्फ 8,897 वोट मिले थे। पार्टी के अधिकांश उम्मीदवार एक हजार वोट तक का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके।

कुछ सीटों पर स्थिति बेहद खराब रही। उदाहरण के लिए, सासाराम विधानसभा क्षेत्र में आशुतोष सिंह को केवल 212 वोट मिले हैं, जबकि उसी सीट पर NOTA पर उनसे ज्यादा 369 वोट पड़े हैं। नौटन में जय प्रकाश को 186 वोट, पारसा में 435 वोट, महुआ में 643 वोट और राघोपुर में 602 वोट मिले हैं।

विभाजन के बाद बड़ा झटका

एनसीपी के विभाजन से पहले शरद पवार के नेतृत्व में पार्टी की मौजूदगी महाराष्ट्र, गोवा, झारखंड, गुजरात और केरल सहित कई राज्यों में थी। लेकिन विभाजन के बाद एनसीपी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा चला गया। बिहार चुनाव का यह प्रयोग पूरी तरह से असफल साबित हुआ है और एनसीपी के राष्ट्रीय विस्तार के सपने पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।

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