Cotton Price Hike 2026: अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कपास के भाव में भारी उछाल; 9 हजार के पार पहुंची कीमतें
Cotton Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण कपास के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। यवतमाल बाजार में कपास का भाव 9,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Yavatmal Cotton Price Hike 2026: युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण वैश्विक बाजार में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसका सीधा असर अब कपास के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कपास की गांठों (गाठी) के दाम बढ़ने से खुले बाजार में कपास का भाव 9,950 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हालांकि, बाजार की इस बढ़ी हुई कीमत का लाभ किसानों से ज्यादा व्यापारियों को मिलता दिखाई दे रहा है।
वैश्विक मांग और कच्चे तेल का प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पॉलिस्टर फाइबर महंगा हो रहा है, जिसके कारण सूती धागे और कपास की वैश्विक मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि युद्ध समाप्त भी हो जाए, तो भी अगले तीन महीनों तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में आने की संभावना कम है। इस वैश्विक हलचल का सीधा असर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वैश्विक बाजार में पहले कपास का भाव 72 से 74 सेंट प्रति पाउंड के स्तर पर था, जो अब बढ़कर 90 से 92 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गया है। इस तेजी के चलते कपास की एक खंडी का भाव 45 हजार रुपये से बढ़कर 62 हजार रुपये तक जा पहुंचा है। पिछले आठ दिनों से कपास के दाम में लगातार तेजी देखी जा रही है। बुधवार को यवतमाल के खुले बाजार में कपास को 8,000 से 9,100 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव प्राप्त हुआ।
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किसानों के बजाय व्यापारियों को मुनाफा
महज आठ दिन पहले तक कपास का औसत भाव करीब 8,000 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 9,000 रुपये से अधिक हो गया है। यानी बहुत कम समय में लगभग 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, बाजार के इस बढ़ते ग्राफ का वास्तविक फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि अधिकांश किसानों के पास अब बेचने के लिए कपास का स्टॉक बचा ही नहीं है। कृषि उपज मंडियों में कपास की आवक बहुत कम हो गई है, ऐसे में इस मूल्यवृद्धि का लाभ उन व्यापारियों को मिल रहा है जिन्होंने पहले ही कपास का भंडारण कर लिया था।
