कोयला स्कैम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Coal Syndicate Exposed: देश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कोयला सेक्टर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब CBI की ताबड़तोड़ छापेमारी में कोयला ग्रेड घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे एक संगठित कोयला सिंडिकेट की परतें उधड़ती चली गईं।
आरोप है कि जिन टेंडरों में जी-13 ग्रेड (RoM कोल-100) कोयला उठाने की अनुमति थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर महंगे जी-10 ग्रेड स्टीम कोयले का उठाव किया गया। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) और मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPJENCO) को वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की खदानों से जी-13 ग्रेड कोयला उठाने का टेंडर मिला था।
इस ग्रेड की बाजार कीमत करीब 2400 प्रति टन बताई जाती है। लेकिन CBI जांच में सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि खदानों से लगभग 8000 प्रति टन कीमत वाला जी 10 स्टीम कोयला निकाला जा रहा था। यानी कागजों में सस्ता कोयला, जबकि हकीकत में महंगा कोयला यही इस पूरे खेल का केंद्र बताया जा रहा है।
वणी की निलजई खदान, घुगूस की महामाया कोल वाशरी और बंदना ट्रान्सपोर्ट से जुड़े कई ठिकानों पर CBI के कार्रवाई के तुरंत बाद KPCL ने 16 दिसंबर को WCL को पत्र भेजकर अगली सूचना तक सभी नए डिलीवरी ऑर्डर पर रोक लगा दी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब KPCL पहले ही रायचूर थर्मल पावर स्टेशन (RTPS) के लिए 1 लाख मीट्रिक टन ROM कोयले की आपूर्ति हेतु 23.75 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जमा करा चुका था।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए महीने के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ताजा कार्रवाई में कोयला क्षेत्र से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेते रंगेहाथों दबोचा गया, जिससे पूरे सिस्टम में खलबली मच गई।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गोपनीय जांच का नतीजा है। CBI की इस कार्रवाई ने न केवल विभागीय मिलीभगत को उजागर किया है, बल्कि सतर्कता तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं लगातार दूसरी कार्रवाई से साफ है कि अब भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू हो चुकी है।