बीएमसी के पास 81 हजार करोड़ की जमा राशि, रितु तावड़े बोली-विकास कार्यों पर चरणबद्ध खर्च
BMC Financial Position Update: रितु तावड़े ने बीएमसी की मजबूत वित्तीय स्थिति का भरोसा दिलाते हुए फेरीवालों के लिए क्यूआर कोड पहचान पत्र योजना और मनपा में मराठी भाषा अनिवार्य करने का ऐलान किया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रितु तावड़े (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Hawker QR Code Policy: बीएमसी नई महापौर रितु तावड़े ने बीएमसी की वित्तीय स्थिति, फेरीवाला नीति और मराठी भाषा को लेकर अहम बातें कही हैं। महापौर पद संभालने के बाद पहली बार उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के बावजूद नगर निगम की आर्थिक सेहत मजबूत बनी रहेगी।
उन्होंने बताया कि बीएमसी के पास इस समय लगभग 81 हजार करोड़ रुपये की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) है। इनमें से करीब 36 हजार करोड़ रुपये विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए आरक्षित हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि एक साथ खर्च की जाएगी।
आवश्यकता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से धन का उपयोग किया जाएगा। साथ ही राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे ताकि भविष्य में जमा राशि और मजबूत हो।
सम्बंधित ख़बरें
Mumbai की प्यास बुझाने के लिए 3 लाख से ज्यादा पेडों की बलि ! बीएमसी के गारगाई बांध से जैव विविधता को खतरा
Mumbai-Goa Highway: गडकरी की डेडलाइन फेल, 15 साल बाद भी अधूरा काम और मानसून की आहट से बढ़ी चिंता
Mumbai: वॉर रूम में CM फडणवीस ने की इंफ्रा परियोजनाओं की समीक्षा, देरी करने वाले ठेकेदारों को नहीं मिलेगा काम
मूंछ मुंडवाकर और नकली दाढ़ी लगाकर ‘इकबाल शेख’ बने थे छगन भुजबल, 40 साल पुराने आंदोलन की कहानी
फेरीवालों को क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र
फेरीवालों को लेकर महापौर ने कहा कि बीएमसी एक नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिसके तहत पंजीकृत फेरीवालों को क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र दिए जाएंगे, इस क्यूआर कोड में फेरीवाले की फोटो, आधार, पैन और लाइसेंस से जुड़ी जानकारी होगी।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल अधिकृत व्यक्ति ही फेरी का व्यवसाय करें, यदि कोई व्यक्ति अपनी जगह किसी और को किराए पर देता पाया गया, तो उसका प्रमाणपत्र रद्द किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें :- जलगांव में जन्म प्रमाण पत्र विवाद, भाजपा नगरसेवक जाकिर खान पर गंभीर आरोप
मराठी भाषा को लेकर रितु तावड़े ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि महानगरपालिका का कामकाज पूरी तरह मराठी में होना चाहिए। महाराष्ट्र के बाहर से आए अधिकारियों को भी मराठी में ही संवाद और परिपत्र जारी करने होंगे, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बार-बार उन्हीं ठेकेदारों को काम दिए जाने पर भी नाराजगी जताई।
