यवतमाल में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, फुलसावंगी में 95.50 मिमी बारिश; 25 सर्किलों में जोरदार बरसात
Yavatmal Weather Update: यवतमाल जिले में 29 जून तक कई सर्किलों में 65 मिमी से अधिक बारिश दर्ज हुई। फुलसावंगी में 95.50 मिमी और खड़कडोह में 107 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
- Written By: केतकी मोडक
बारिश प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Yavatmal Fulsawangi Heavy Rainfall: राज्य में 29 जून 2026 तक 65 मिमी से अधिक हुई वर्षा की रिपोर्ट के अनुसार यवतमाल जिले के विभिन्न तहसीलों के 25 राजस्व सर्किलों में भारी बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान सबसे अधिक 95.50 मिमी वर्षा महागांव तहसील के फुलसावंगी सर्किल में रिकॉर्ड की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यवतमाल तहसील के हिवरी और अर्जुना सर्किल में 93.50 मिमी, जबकि अकोलाबाजार में 87 मिमी बारिश हुई। उमरखेड़ और विडूल सर्किल में 88-88 मिमी, रासा में 88.25 मिमी, भालर में 86 मिमी तथा खड़कडोह (झरी-जामनी) में सर्वाधिक 107 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
राजस्व सर्किल अनुसार दर्ज वर्षा (65 मिमी से अधिक)
| राजस्व सर्किल (तहसील) | दर्ज वर्षा (मिमी में) |
| हिवरा (महागांव) | 77.00 |
| कुरली (घाटंजी) | 72.00 |
| रूजा (केलापुर) | 68.00 |
| शिवानी (घाटंजी) | 68.00 |
| वर्धा सर्किल (रालेगांव) | 68.00 |
| शिरोली (घाटंजी) | 66.50 |
| घोटी (घाटंजी) | 66.50 |
तहसील अनुसार कुल वर्षा और सामान्य का प्रतिशत
| तहसील का नाम | दर्ज वर्षा (मिमी में) | सामान्य वर्षा का प्रतिशत | स्थिति / टिप्पणी |
| झरी-जामनी | 169.1 | 165.8% | सामान्य से अधिक |
| नेर | 152.9 | 119.2% | सामान्य से अधिक |
| दारव्हा | 157.7 | 106.3% | सामान्य से अधिक (दैनिक: 39.2 मिमी) |
| दिग्रस | 171.2 | 101.1% | सामान्य से अधिक (दैनिक: 35.6 मिमी) |
| मारेगांव | 131.4 | 100.2% | सामान्य से अधिक |
| महागांव | 56.4 | — | दैनिक सर्वाधिक तहसील वर्षा |
| घाटंजी | 42.0 | 58.7% | अभी भी सामान्य से कम |
| पुसद | 37.7 | — | दैनिक वर्षा दर्ज |
| बाभुलगांव | — | 65.0% | अभी भी सामान्य से कम |
| केलापुर | — | 55.0% | अभी भी सामान्य से कम |
दारव्हा, दिग्रस, मारेगांव, झरी-जामनी में अधिक वर्षा
यवतमाल जिले में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। 29 जून 2026 तक जिले में औसतन 24.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे जून माह की कुल संचयी वर्षा 130.7 मिमी तक पहुंच गई। यह जिले की सामान्य वर्षा का 82.5 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जिले में 165.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस वर्ष कम या बहुत ज्यादा वर्षा होने का मिला-जुला दृश्य सामने आ रहा है।
अल नीनो के बीच पानी बचाना सबसे बड़ी जरूरत
महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ ने कहा है कि वर्ष 2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है और यदि समय रहते जल संरक्षण के व्यापक उपाय नहीं किए गए, तो राज्य को आने वाले समय में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पानी बचा तो ही महाराष्ट्र बचेगा और प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण का संकल्प लेना होगा। संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 24 जून तक देश में सामान्य से 14 प्रतिशत तथा महाराष्ट्र में 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जून का महीना समाप्त होने को है, लेकिन राज्य के कई क्षेत्रों में अभी तक बुवाई योग्य पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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उन्होंने कहा कि प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में सामान्य से लगभग तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ मान रहे हैं। ऐसे वर्षों में भारत में मानसून देर से आता है और वर्षा असमान रहती है। विशेष रूप से मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र के वर्षाछाया वाले क्षेत्रों तथा उत्तर महाराष्ट्र के कुछ जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका रहती है।
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मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अप्रैल माह से ही कृषि, जल संसाधन, मृदा एवं जल संरक्षण तथा आपदा प्रबंधन विभागों को संभावित जल संकट से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन जुलाई से सितंबर तक मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। मंत्री राठौड़ ने कहा कि 1 जुलाई को कृषि दिवस और पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक की जयंती के अवसर पर सभी को जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वसंतराव नाईक के आदर्शों पर चलते हुए मृदा एवं जल संरक्षण विभाग 24 घंटे कार्य कर रहा है।
