
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Washim Child Marriage News: महाराष्ट्र के वाशिम जिले से बाल अधिकारों की सुरक्षा की एक बड़ी खबर सामने आई है। रिसोड तालुका के हराल गांव में प्रशासन ने समय पर हस्तक्षेप कर एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को बाल विवाह की बेड़ियों में बंधने से बचा लिया। गुप्त सूचना के आधार पर हुई इस कार्रवाई ने समाज में जागरूकता का संदेश दिया है।
घटना की शुरुआत चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1098 पर मिली एक गोपनीय कॉल से हुई। सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास विभाग सक्रिय हो गया। वाशिम जिला अधिकारी उत्तम शिंदे और जिला बाल संरक्षण अधिकारी भगवान ढोले के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। सबसे पहले लड़की के दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें उसकी आयु मात्र 16 वर्ष पाई गई, जो कानूनी रूप से विवाह योग्य नहीं है।
चिल्ड्रन लाइन के समन्वयक अविनाश सोनुने के मार्गदर्शन में टीम तत्काल हराल गांव पहुंची। वहां टीम के सदस्यों अमोल देशपांडे, प्रतिभा घनसावत और अन्य अधिकारियों ने लड़की के माता-पिता से मुलाकात की। शुरुआत में परिजनों में झिझक थी, लेकिन प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कानूनी परिणामों और कम उम्र में शादी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में विस्तार से समझाया।
काउंसलिंग का सकारात्मक प्रभाव पड़ा और परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की। अधिकारियों ने मौके पर ही माता-पिता से एक लिखित हलफनामा लिया, जिसमें उन्होंने शपथ ली कि वे अपनी बेटी की शादी 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले नहीं करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय ग्राम सेवक, सरपंच और तालुका संरक्षण अधिकारी बंडू धनगर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक किशोरी का बचपन सुरक्षित किया है, बल्कि गांव में बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी दिया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें ताकि किसी भी मासूम का भविष्य अंधकारमय न हो।






