वाशिम जिले में रबी की बुआई आरंभ, अक्टूबर अंत तक केवल 2.42 प्रतिशत बुआई
Washim District: वाशिम जिले में रबी की बुआई शुरू, लेकिन अब तक केवल 2.42% क्षेत्र में बुआई हुई। बेमौसम बारिश और ठंड की कमी से फसलों की वृद्धि पर असर हुआ है।
- Written By: आंचल लोखंडे
वाशिम जिले में रबी की बुआई आरंभ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Washim News: वाशिम जिले में रबी फसलों की बुआई का कार्य आरंभ हो गया है। अक्टूबर महीने के अंत तक जिले में केवल 2.42 प्रतिशत बुआई पूरी हो सकी है। जिले में हो रही बेमौसम बारिश के कारण भूमि में अत्यधिक नमी बनी हुई है। इसी वजह से किसानों ने रबी की बुआई को लेकर सतर्कता बरती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक नमी वाली जमीन में यदि इस समय बुआई की जाए, तो फसलों में फफूंदजन्य रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए किसानों ने इस स्थिति में बुआई टालने का निर्णय लिया है। जिले में औसतन 89,774 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुआई की अपेक्षा रहती है, लेकिन इस वर्ष औसतन से अधिक वर्षा होने के कारण कृषि विभाग ने 1,34,000 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मालेगांव तालुका में सर्वाधिक प्रगति
सोयाबीन की कटाई पूरी होने के बाद किसानों ने रबी फसल की तैयारी शुरू कर दी थी। पहले अधिक वर्षा से भूमि में पर्याप्त नमी बन गई थी, जिससे रबी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण बना। किसान अब बीज और खाद की खरीदारी में जुटे हैं। हालांकि, पिछले सप्ताह लगातार हुई बारिश से जमीन में अधिक नमी हो जाने के कारण बुआई प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में गेहूं और चना जैसी फसलों में रोग फैलने की आशंका है।
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बीज प्रक्रिया के बाद ही करें बुआई
लगातार बारिश से जिले में रबी की बुआई प्रभावित हुई है, लेकिन मालेगांव तालुका में बुआई का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यहां 3 नवंबर तक 1,170 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की जा चुकी है। पिछले सप्ताह जिले के कई भागों में लगातार 4 से 5 दिनों तक वर्षा हुई, जिससे बुआई कार्य में विलंब हुआ और क्षेत्रफल में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं और चना की बुआई करने से पूर्व बीज की प्रक्रिया (ट्रीटमेंट) अवश्य करें।
ठंड की कमी से फसलों पर विपरीत असर
आमतौर पर दीपावली के बाद जिले में ठंड का असर दिखाई देने लगता है, लेकिन इस वर्ष दीपावली के 15 दिन बाद भी ठंड नहीं पड़ी है। इस कारण रबी फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। ठंड न पड़ने से बोए गए चना और गेहूं के बीजों को अनुकूल तापमान नहीं मिल पा रहा है। रबी फसलों के लिए ठंड आवश्यक होती है। ठंड के मौसम में गेहूं और चना की फसल अच्छी तरह बढ़ती है। परंतु तापमान में गिरावट न होने से इन फसलों की वृद्धि में बाधा आ सकती है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो रबी उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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तालुका-वार बुआई की स्थिति
- वाशिम तालुका: 103 हेक्टेयर
- मालेगांव तालुका: 1,170 हेक्टेयर
- रिसोड तालुका: 65 हेक्टेयर
- मंगरुलपीर तालुका: 683 हेक्टेयर
- मानोरा तालुका: 48 हेक्टेयर
- कारंजा तालुका: 107 हेक्टेयर
