‘पोषण भी पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण पहल का जिलाधिकारी ने लिया जायजा, सुधारेगी आंगनबाड़ियों की गुणवत्ता
Poshan Bhi Padhai Bhi: वाशिम में जिलाधिकारी ने ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण पहल का निरीक्षण किया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण समन्वय पर मार्गदर्शन दिया।
- Written By: आंचल लोखंडे
‘पोषण भी पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण पहल का जिलाधिकारी ने लिया जायजा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Washim Anganwadi Program: प्रारंभिक बाल्यावस्था में बाल देखभाल और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण पहल का जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षण सत्र का अवलोकन किया और प्रशिक्षु आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बीच संतुलित समन्वय बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान जिला परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (बाल कल्याण) संजय गणवीर, बाल विकास परियोजना अधिकारी मदन नायक, विस्तार अधिकारी अनिल उल्हेमाले, ई-अकार (रॉकेट लर्निंग) जिला समन्वयक स्नेहा वरकड, पाठ्यक्रम निदेशक अर्चना फले, अमिता गिर्हे तथा मुख्य प्रशिक्षक दीपाली कांबले, मीना गावड़े, ज्योति महल्ले, नूतन धोटे, सुरेखा बोले, मैथिली घनवट, जयश्री देवगिरिकर सहित सभी प्रशिक्षु आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित थीं।
‘पोषण भी पढ़ाई भी’
‘पोषण भी पढ़ाई भी’ पहल 2023 में शुरू की गई सरकार की अभिनव योजनाओं में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों में प्री-स्कूल शिक्षा के महत्व को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण में बच्चों के लिए खेल, कहानी, चित्रकला, गीत और नाटक जैसी गतिविधियों के माध्यम से सीखने-सिखाने के माहौल को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाता है।
सम्बंधित ख़बरें
Washim Crime: पत्नी की हत्या के बाद शव को कार में लेकर घूमता रहा पति, फिर पुलिस के सामने किया सरेंडर
Washim News: लेह-लद्दाख में सेना के वाहन से टक्कर, वाशिम के दो युवा वकीलों की मौके पर मौत
नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग पर खूनी खेल; पत्नी की हत्या के बाद कारंजा शहर पुलिस थाने पहुंचा हत्यारा पति
लेह-लद्दाख में भीषण सड़क हादसा, वाशिम के दो युवा वकीलों की दर्दनाक मौत, जिले में शोक की लहर
‘नवचेतना’ पहल के माध्यम से
शून्य से तीन वर्ष के बच्चों का सर्वांगीण विकास प्रशिक्षण सत्र में ‘नवचेतना’ पहल की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शून्य से तीन वर्ष की आयु के बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया जाता है। माताओं से नियमित संवाद कर पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और मानसिक विकास के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
ये भी पढ़े: सिरोंचा में सुविधाओं का अभाव, सुविधा के लिए संघर्ष जारी, सरकार और प्रशासन की अनदेखी
जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने कहा कि “आंगनबाड़ी बच्चों के सर्वांगीण विकास की पहली पाठशाला है। यहीं से उनकी शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता की नींव रखी जाती है। इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को बच्चों के साथ प्रेम, धैर्य और रचनात्मकता से कार्य करना चाहिए।”
