Forest Department Aler:वर्धा जिले में बाघ (सोर्सः सोशल मीडिया)
Wardha Wildlife News: राज्य में बाघ, तेंदुआ जैसे हिंसक वन्यजीवों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही इन वन्यजीवों का गांवों और शहरों की ओर मुक्त विचरण भी बढ़ गया है। जिले के प्रादेशिक एवं वन्यजीव वनक्षेत्रों में इन जीवों की संख्या अधिक होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका तेज हो गई है। इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग अलर्ट मोड पर कार्य कर रहा है। वनक्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के साथ ही गांव-गांव जाकर ग्रामीणों में जनजागरण और सतर्कता का आह्वान किया जा रहा है।
राज्य के कुछ जिलों में तेंदुए का आतंक बढ़ा है और कई शहरों में तेंदुए के घुसने की घटनाएं सामने आई हैं। गांवों और शहरों में प्रवेश कर ये हिंसक वन्यजीव मनुष्यों पर भी हमला कर रहे हैं। इसी तरह की स्थिति वर्धा जिले में भी उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। जिले में स्थित बोर व्याघ्र प्रकल्प क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं की संख्या बढ़ने की जानकारी मिल रही है। ये वन्यजीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र छोड़कर गांवों और खेतों में दिखाई दे रहे हैं। कई बार तेंदुओं द्वारा गांवों में घुसकर पालतू पशुओं का शिकार करने की घटनाएं भी सामने आई हैं। यही स्थिति प्रादेशिक वनक्षेत्रों में भी बनी हुई है।
पिछले कुछ महीनों से समुद्रपुर वनपरिक्षेत्र में एक बाघिन और उसके तीन शावकों का मुक्त विचरण जारी है। इसी क्षेत्र में एक अन्य बाघ के होने की भी जानकारी है। इसके अलावा चंद्रपुर जिले के वनक्षेत्र से कुछ बाघों का समुद्रपुर और हिंगनघाट तहसील की सीमा क्षेत्रों में भी विचरण हो रहा है। इनके आतंक से आसपास के 20 से 25 गांवों में दहशत का माहौल है। इन बाघों को पकड़ने के लिए वन विभाग द्वारा कई उपाय किए गए हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। आए दिन ये बाघ पालतू पशुओं का शिकार कर रहे हैं।
कारंजा और आष्टी वनक्षेत्रों में भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। जंगलों से सटे गांवों में हिंसक वन्यजीवों के बढ़ते विचरण से किसान और ग्रामीण भयभीत हैं। अब ये वन्यजीव शहरों की ओर भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। वर्धा शहर से सटे पिपरी मेघे, उमरी मेघे और सेलू काटे परिसर में तेंदुए के मुक्त विचरण की जानकारी सामने आई है। हाल ही में वर्धा के वनपरिक्षेत्र अधिकारी ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की थी। शहर के आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए के पगमार्क भी पाए गए हैं।
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स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रादेशिक एवं वन्यजीव विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिले के सभी वनपरिक्षेत्रों में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मानव–वन्यजीव संघर्ष को टालने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गश्त बढ़ा दी गई है और प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता संबंधी चेतावनियां जारी की गई हैं। वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर कार्य कर रहा है।