वर्धा के 14 गांवों में पांच दिनों से पेयजल संकट, मुख्य पाइपलाइन लीकेज से जलापूर्ति ठप
Wardha Water Supply: वर्धा के 14 गांवों में मुख्य पाइपलाइन लीकेज के कारण पिछले पांच दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है। हजारों ग्रामीण पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Water Supply (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Wardha Water Crisis: वर्धा शहर से सटे 14 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने वाली क्षेत्रीय जलापूर्ति योजना पिछले पांच दिनों से प्रभावित है। मुख्य पाइप लाइन में लीकेज आने के कारण कई गांवों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे हजारों नागरिकों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को पीने के पानी के लिए हैंडपंप, कुओं और आसपास के क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण एवं जल जीवन मिशन के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत पिपरी (मेघे), कारला, सावंगी (मेघे), सिंदी (मेघे), बोरगांव (मेघे), उमरी (मेघे), साटोदा, आलोदी, दत्तपुर, वरुड, वायगांव (निपाणी), नालवाड़ी, म्हसाला और सालोड हिरापुर गांवों को धाम परियोजना से पेयजल आपूर्ति की जाती है। प्रशासन के अनुसार, येलाकेली के पास खुदाई कार्य के दौरान मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से उसमें लीकेज हो गया, जिसके कारण गुरुवार से जलापूर्ति बाधित है।
पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण
लगातार पांच दिनों से पानी नहीं मिलने के कारण लोगों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जिन परिवारों के पास निजी बोरवेल या वैकल्पिक जल स्रोत हैं, उन्हें कुछ राहत मिल रही है, जबकि अधिकांश नागरिकों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुख्य पाइप लाइन में लीकेज और तकनीकी खराबी की घटनाएं अब लगातार होने लगी हैं। इसके बावजूद स्थायी मरम्मत और नियमित रखरखाव नहीं किए जाने से हर बार कई दिनों तक जलापूर्ति बाधित रहती है।
समस्या को लेकर गंभीर नहीं संबंधित अधिकारी
लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे है। साथ ही पाइपलाइन मरम्मत की उचित योजना, वैकल्पिक जलापूर्ति और समय पर सूचना देने में भी प्रशासन विफल रहा है।
ग्रामीणों ने महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण से मांग की है कि मुख्य पाइपलाइन की तात्कालिक एवं स्थायी मरम्मत कर जल्द से जल्द नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक उपाय किए जाए।
