

Nagpur Non-Revenue Water: नागपुर सिटी में जलापूर्ति योजना को लेकर भले ही राजनीतिक स्तर पर कई तरह के आरोप लगते रहे हों, इसके विपरीत जलापूर्ति में लगातार विस्तार और नई तकनीकी का उपयोग कर सक्षम प्रणाली लागू करने का प्रयास जारी है। यही कारण रहा कि 14 वर्षों में सिटी की जलापूर्ति का नेटवर्क दोगुना हो पाया है, साथ ही जलापूर्ति से प्राप्त होने वाले राजस्व में भी वृद्धि हुई है।
उल्लेखनीय है कि ऑरेंज सिटी वाटर की ओर से जलापूर्ति योजना को लेकर रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। हाल ही में यह आरोप लगाया गया था कि 2,030 करोड़ रुपये के भुगतान के बावजूद बुनियादी ढांचे के विकास में देरी हुई और नॉन-रेवेन्यू वाटर 28.7% तक पहुंच गया है जिसके फलस्वरूप अब पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है।
नॉन-रेवेन्यू वाटर घटाने के प्रयास पानी की बर्बादी या 'नॉन-रेवेन्यू वाटर' को लेकर स्पष्ट किया गया है कि ऑरेंज सिटी वाटर मार्च 2027 तक इसे 25% से नीचे लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए पाइपलाइनों की मरम्मत, पुराने मीटर बदलने और लीकेज (रिसाव) रोकने के लिए निरंतर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक 200.09 करोड़ रुपये के पुनर्वास और प्रतिस्थापन (R&R) कार्यों का लक्ष्य निर्धारित था, इसके विपरीत कंपनी ने अपनी प्रतिबद्धता को साबित करते हुए 211.64 करोड़ रुपये का काम पहले ही पूरा कर लिया है जो लक्ष्य से अधिक है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित इस परियोजना में ओसीडब्ल्यू ने अपनी ओर से 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। हालांकि महानगरपालिका के पास अप्रैल 2024 से कार्यों का प्रमाणीकरण और भुगतान लंबित है, फिर भी कंपनी पाइपलाइन व मीटर बदलने तथा नेटवर्क सुधार का काम पूरी गति से कर रही है, ताकि नागरिकों को बेहतर सेवा मिल सके।
नागपुर भारत का पहला ऐसा शहर बन गया है जिसने जल आपूर्ति प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत कंट्रोल और कमांड सेंटर (हबग्रेड) के माध्यम से 'डिजिटल ट्विन' तकनीक को लागू किया है। इससे नेटवर्क की रियल टाइम निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही कंपनी ने कुछ महत्वपूर्ण उपभोक्ता-अनुकूल डिजिटल कदम उठाए हैं। जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) तकनीक के जरिए हर उपभोक्ता की संपत्ति की मैपिंग और टैगिंग की गई है जिससे एक सटीक डिजिटल डेटाबेस तैयार हुआ है।
'नागपुर जल ग्राहक सेवा एप' लॉन्च किया गया है जिसके माध्यम से उपभोक्ता नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं, पानी का बिल भर सकते हैं और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।
नेटवर्क का विस्तार: 2012 में शहर का जल वितरण नेटवर्क मात्र 2,051 किलोमीटर था, जो 2026 में बढ़कर 4,631 किलोमीटर हो गया है।
उपभोक्ता कनेक्शन : 2012 में केवल 1.84 लाख कनेक्शन थे, जबकि आज यह संख्या 4.50 लाख तक पहुंच चुकी है।
राजस्व में वृद्धि : जल वितरण में सुधार के चलते मनपा के राजस्व में बड़ा उछाल आया है। 2012 में मनपा को जहां 72 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था वहीं 2026 में यह बढ़कर 234 करोड़ रुपये हो गया है।