JSSC CGL Controversy: बाबूलाल मरांडी ने CID जांच पर उठाए सवाल, बोले- कई अहम पहलू जांच से बाहर

JSSC CID Investigation: JSSC-CGL परीक्षा विवाद में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CID जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने 120 अभ्यर्थियों के होटल में ठहरने की जांच नहीं होने का आरोप लगाया।
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बाबूलाल मरांडीसोर्स- IANS
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Babulal Marandi CID Investigation: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मरांडी का आरोप है कि जांच में परीक्षा से पहले करीब 120 अभ्यर्थियों के पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ठहरने के मामले की पूरी पड़ताल नहीं की गई।

उन्होंने दावा किया कि CID के सत्यापन में होटल में JSSC-CGL परीक्षार्थियों के ठहरने के साक्ष्य मिले थे, लेकिन इसके बावजूद इस पहलू की प्रभावी जांच नहीं हुई। मरांडी ने कहा कि यदि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की जानकारी दी गई थी, तो इससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

CID जांच पर मरांडी ने उठाए गंभीर सवाल

बाबूलाल मरांडी सीआईडी ने मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों के मामले पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें परीक्षा से पहले नेपाल भेजकर परीक्षा के उत्तर रटवाए जाने की बात जांच के दौरान सामने आई थी।

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा वर्ष 2024 में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। परीक्षा में प्रश्नपत्र और उत्तर पहले से उपलब्ध कराए जाने समेत कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।

120 अभ्यर्थियों के होटल में ठहरने का किया दावा

बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को कहा कि सीआईडी जांच से संबंधित कई दस्तावेज अभ्यर्थियों के पास मौजूद हैं। इन दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया था।

उनके अनुसार, करीब 120 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पास नियामतपुर स्थित एक होटल में ठहराया गया था।

होटल में परीक्षार्थियों के ठहरने के मिले थे साक्ष्य

मरांडी का आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को एक साथ होटल में ठहराने का उद्देश्य उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों की पहले से तैयारी कराना था। उन्होंने कहा कि सीआईडी ने होटल का सत्यापन भी किया था

और वहां जेएसएससी-सीजीएल के परीक्षार्थियों के ठहरने के साक्ष्य मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद नियामतपुर में अभ्यर्थियों के ठहरने और वहां उन्हें कथित तौर पर परीक्षा की तैयारी कराए जाने के आरोप की आगे प्रभावी जांच नहीं की गई।

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‘कई अहम पहलुओं की जांच नहीं हुई’- मरांडी

उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और इस महत्वपूर्ण तथ्य को उच्च न्यायालय के समक्ष भी पूरी तरह नहीं रखा गया। मरांडी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से जुड़े इन अभ्यर्थियों में से कई बाद में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए।

ईमानदार अभ्यर्थियों के नुकसान का हवाला

उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी तो यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय भी दिया था। इसके बावजूद, उनकी जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल जाकर संबंधित अभ्यर्थियों और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच नहीं की गई।

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