Wardha new borewell plan (सोर्सः सोशल मीडिया)
Wardha New Borewell Plan: वर्धा जिले में हर वर्ष गर्मी के मौसम में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस संभावित संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है और विभिन्न उपाय योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार Wardha जिले की आठ पंचायत समितियों के अंतर्गत कुल 6,052 बोरवेल हैं। इनमें से 5,044 बोरवेल चालू स्थिति में हैं, जबकि करीब 1,008 बोरवेल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। जमीन के भीतर पानी का स्रोत कमजोर होने के कारण ये बोरवेल बंद पड़े हैं। जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए कार्ययोजना प्रारूप के अनुसार 154 गांवों में आवश्यकता के आधार पर लगभग 198 नए बोरवेल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
बताया जा रहा है कि इस वर्ष जिले के 757 गांवों में जलसंकट की आशंका जताई जा रही है। जलाशयों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है और भूजल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। हर साल मई और जून के महीनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। विशेष रूप से अष्टी, करंजा, आर्वी, हिंगणघाट और समुद्रपुर तहसील के कुछ हिस्सों में जलसंकट की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत नए बोरवेल निर्माण, निजी कुओं का अधिग्रहण, सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण और जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत जैसे कई उपाय किए जाएंगे।
कार्ययोजना के प्रारूप के अनुसार प्रभावित गांवों में कुल 876 उपाय योजनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें पहले चरण में 58 गांवों में 76 बोरवेल, जबकि दूसरे चरण में 96 गांवों में 122 बोरवेल बनाए जाने की योजना है। इस प्रकार कुल मिलाकर करीब 198 नए बोरवेल निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अलावा पुराने बोरवेल की मरम्मत और सुधार कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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हर वर्ष भूजल स्तर नीचे जाने के कारण कई जलस्रोत कमजोर हो रहे हैं। कई कुए सूखने लगे हैं और कई क्षेत्रों में बोरवेल भी बंद हो गए हैं। वर्धा जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अनुसार आठों पंचायत समिति क्षेत्रों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे पानी के स्रोत कमजोर हो गए हैं और कई बोरवेल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं।