Wardha religious site (सोर्सः सोशल मीडिया)
Wardha Religious Site: वर्धा जिले के कारंजा-घाडगे तहसील अंतर्गत ढगा क्षेत्र स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यहां स्थित ढगा भूवन शिव मंदिर और स्वयंभू महाकाली देवी मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
इसी परिसर में स्थित ऐतिहासिक ‘वानर कुंड’ का जलस्तर इस वर्ष पूरी तरह शून्य पर पहुंच गया है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पहले युगों से यह कुंड कभी पूरी तरह नहीं सूखा था। जनश्रुति के अनुसार ब्राम्हणवाडा के घने जंगलों में त्रेता युग के समय धौम्य ऋषि का आश्रम था।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम की वानर सेना ने रावण पर विजय अभियान के दौरान इस स्थान पर विश्राम किया था। उस समय जल की व्यवस्था हेतु धौम्य ऋषि द्वारा हवन कुंड से जल प्रकट किए जाने की कथा प्रचलित है, जिससे इस कुंड का निर्माण हुआ माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इस कुंड का जलस्तर कभी कम नहीं हुआ था। हालांकि पिछले वर्ष पहली बार जलस्तर में कमी देखी गई, जबकि इस वर्ष यह पूरी तरह सूख गया है।
पहाड़ी से सटे भूमि स्तर पर बना यह लगभग ढाई फीट गहरा छोटा कुंड क्षेत्र के वन्यजीवों के लिए भी पानी का प्रमुख स्रोत रहा है। आसपास के जंगलों से पशु-पक्षी यहां पानी पीने आते थे। श्रद्धालुओं के बीच भी इस कुंड का विशेष धार्मिक महत्व रहा है।
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अचानक जलस्तर समाप्त हो जाने से क्षेत्र में चिंता का माहौल है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने संबंधित विभाग से वैज्ञानिक जांच कराने तथा आवश्यक संरक्षण उपाय शुरू करने की मांग की है। वानर कुंड का सूखना जहां आस्था से जुड़ा विषय है, वहीं इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत अध्ययन किए जाने की अपेक्षा जताई जा रही है, ताकि इसके कारणों का पता लगाकर भविष्य में संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।