पुणे-पिंपरी की हवा में ‘सीमेंट का जहर’! हर साल 50 हजार टन धूल घुलने का दावा
Pune Air Pollution: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की हवा में हर साल 50 हजार टन सीमेंट धूल घुलने का दावा किया गया है। 500 से अधिक RMC प्लांट और अनियंत्रित निर्माण कार्यों को प्रदूषण का बड़ा कारण बताया जा रहा।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे सीमेंट प्रदूषण (सौ. सोशल मीडिया )
Pune Pimpri Cement Dust: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की पहचान कभी अपनी शुद्ध हवा और खुशनुमा मौसम के लिए होती थी, लेकिन आज यह ‘सीमेंट के जहर’ की चपेट में है।
एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इन जुड़वां शहरों की हवा में हर साल लगभग 50 हजार टन सीमेंट की धूल घुल रही है। आंकड़ों का गणित और भी डरावना है। शहर की हवा में हर घंटे करीब 6 टन सूक्ष्म धूल के कण मिल रहे हैं।
आरएमसी प्लांट सबसे बड़े कारण इस खतरनाक प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहर के भीतर और आसपास संचालित हो रहे 500 से अधिक रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट हैं।
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नियमों को ताक पर रखकर हो रहे अनियंत्रित निर्माण कार्यों और खुले में निर्माण सामग्री ले जाने वाले डंपरों ने स्थिति को भयावह बना दिया है। वायुमंडल में पीएम 10 और पीएम 2.5 का स्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे पूरा शहर धूल की एक घनी चादर में लिपटा नजर आता है।
प्रशासन के खिलाफ फैला जन आक्रोश
- हैरानी की बात यह है कि पुणे महानगर पालिका द्वारा की जा रही कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिख रही है।
- नागरिकों का आरोप है कि प्रदूषण फैलाने वाले बड़े बिल्डरों और प्लांट मालिकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। शुद्ध हवा के अभाव में गिरता जीवन स्तर अब पुणे के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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यदि निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन के 66 कड़े नियम लागू नहीं किए गए और आरएमसी प्लांटस् पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो पुणे जल्द ही रहने योग्य नहीं बचेगा।
– पर्यावरण विशेषज्ञ
