वर्धा में स्क्रब टाइफस का खतरा, कीड़ों के काटने से फैलती है ये घातक बीमारी
Wardha News: वर्धा में स्क्रब टाइफस के मामले बढ़े, कीड़ों के काटने से फैलने वाली बीमारी में बुखार, रैशेज़ और गंभीर मामलों में अंगों की फेलियर की संभावना।
- Written By: आकाश मसने
स्क्रब टाइफस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Scrub Typhus Cases In Wardha: महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्क्रब टाइफस के कुछ मामले सामने आ रहे हैं। यह बीमारी ओरिएंटिया सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है, जो मुख्य रूप से कीड़ों के काटने से फैलती है। मानसून और उसके बाद का समय इस बीमारी के फैलने का प्रमुख मौसम माना जाता है।
इस बीमारी के लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, बदन दर्द, सिरदर्द, थकान महसूस होना, शरीर पर लाल चकत्ते या रैशेज़, कुछ मरीजों में कीड़े के काटने की जगह पर काली पपड़ी बनती है। गंभीर मामलों में सांस लेने में परेशानी, उल्टियां, भ्रम की स्थिति, दौरे, लीवर या किडनी फेल होने की संभावना है।
कीड़ों के काटने से होती है बीमारी
यह बीमारी अधिकतर झाड़ीदार इलाके, घास वाले स्थानों या खेतों में काम करने वाले लोगों में पाई जाती है। यह कीड़ों के काटने के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। इस बीमारी से बचने के लिए खेतों, झाड़ियों या घास वाले क्षेत्रों में जाते समय पूरे बाजू के कपड़े, मोजे और जूते पहनें।
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कीटनाशक का उपयोग करें। घास पर बैठना या सोना टालें। खेत या बाहर से लौटने के बाद कपड़े तुरंत धोएं। अगर बुखार, थकावट या शरीर पर चकत्ते महसूस हों, तो देरी न करते हुए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। यह बीमारी यदि समय रहते पहचान ली जाए और उचित इलाज पर पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
समय पर जांच कर सही इलाज ले
जिले के बालरोग विशेषज्ञ डॉ़ सचिन पावडे ने कहा कि, बुखार को मामूली सर्दी-ज़ुकाम समझकर नजरअंदाज़ न करें। वर्तमान में स्क्रब टाइफस के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, इसलिए हर किसी को सतर्क रहना आवश्यक है। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है, ऐसा भी उन्होंने बताया।
