प्रेसबायोपिया (AI generated photo)
Presbyopia-Free Model District: बढ़ती उम्र के साथ लगभग हर व्यक्ति को ‘प्रेसबायोपिया’ यानी जरादृष्टि या बुढ़ापे की निकट दृष्टि दोष की समस्या होती है। वर्धा जिले को इस नेत्र रोग से मुक्त करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नज फाउंडेशन के साथ एक सामंजस्य समझौता किया है। इस सहयोग के तहत जिले के हर नागरिक की जांच की जाएगी और जिन लोगों में यह समस्या पाई जाएगी, उन्हें मुफ्त चश्मे वितरित किए जाएंगे।
प्रेसबायोपिया निदान और रोकथाम के लिए वर्धा को मॉडल जिला बनाया जाएगा और इसी आधार पर आगे पूरे राज्य में यह अभियान चलाया जाएगा। इस साझेदारी से अंधत्व की रोकथाम के क्षेत्र में बड़ा योगदान मिलेगा, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा। नज फाउंडेशन ने शिक्षा, पर्यावरण और उद्यमिता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है।
इस फाउंडेशन की भागीदारी से वर्धा जिले में प्रेसबायोपिया निदान और चश्मा वितरण का एक मॉडल तैयार होगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि अंधत्व नियंत्रण मेरे प्राथमिक उद्देश्यों में से एक है और इस दिशा में फाउंडेशन का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सामंजस्य करार वर्धा के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर और विधायक सुमित वानखेड़े की विशेष पहल से किया गया है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नज फाउंडेशन के सहयोग से पूरे राज्य को ‘प्रेसबायोपिया मुक्त’ बनाया जाए। इसके लिए इस बीमारी की जांच और चश्मा वितरण की प्रक्रिया तय करने हेतु वर्धा जिले में 3 से 6 महीने की अवधि के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके लिए लगभग 4 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। वर्धा को इस कार्य का मॉडल जिला बनाकर बाद में यह पहल पूरे महाराष्ट्र में लागू की जाएगी।
सन 2024 में वर्धा जिले की आबादी लगभग 14 लाख थी, जिनमें से 9 लाख (67 प्रश) ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 2 लाख लोग प्रेसबायोपिया से पीड़ित होने का अनुमान है। प्रत्येक नागरिक की नि:शुल्क जांच की जाएगी और जिन्हें यह रोग होगा, उन्हें मुफ्त चश्मे दिए जाएंगे। अनुमान है कि इन चश्मों के वितरण से लोगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और इससे जिले का वार्षिक उत्पादन लाभ लगभग 130 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
ग्रामीण जीवनोन्नती अभियान के सहयोग से नज फाउंडेशन 35 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति में प्रेसबायोपिया संबंधी जनजागरण करेगा। इसके लिए आशा कार्यकर्ता और नेत्र सखियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञ, नेत्र सखियां और आशा कार्यकर्ता गांव स्तर पर ही नेत्र जांच करेंगे और जिनमें समस्या पाई जाएगी, उन्हें गांव में ही उपयुक्त चश्मे प्रदान किए जाएंगे। नज फाउंडेशन इस अभियान के लिए आर्थिक सहायता, चश्मे, आवश्यक सामग्री, प्रशिक्षण, नियंत्रण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालेगा।
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प्रेसबायोपिया एक आयु-संबंधी नेत्र रोग है, जिसे ‘जरादृष्टि’ या ‘बुढ़ापे की दूर दृष्टि’ कहा जाता है। आमतौर पर यह समस्या 40 वर्ष के बाद दिखाई देती है। इसमें आंखों का लेंस कम लचीला हो जाता है, जिससे पास की वस्तुएं देखने में कठिनाई होती है। छोटे अक्षर पढ़ते समय सिरदर्द, आंखों में तनाव और धुंधलापन महसूस होता है। इसका समाधान विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सक से जांच करवाकर बाइफोकल चश्मा पहनना है।
जिले के कारंजा तहसील से इस अभियान की शुरुआत दिसंबर के पहले सप्ताह में की जाएगी। इस अवसर पर नेत्र सखियों और आशा कार्यकर्ताओं को नज फाउंडेशन द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे जिले में फैलाया जाएगा।