Wardha News: पशुसंवर्धन विभाग ने पशुओं के लिए ईयर टैगिंग अनिवार्य कर दी है. वर्धा जिले में कुल 3 लाख 9 हजार 171 पशुधन का ईयर टैगिंग किया गया है, जिसमें सबसे अधिक संख्या गोवंशीय पशुओं की है. पशुसंवर्धन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत पशुधन प्रणाली में पंजीकरण और कान पर टैग ईयर टैगिंग के बिना राज्य में किसी भी पशु की खरीदबिक्री या उपचार नहीं किया जाएगा.
इसके बाद जिले में विशेष अभियान चलाया गया. इस अभियान के तहत पशुओं का आधार कार्ड माने जाने वाले ईयर टैगिंग को प्राथमिकता देते हुए जिले के 3 लाख 9 हजार 171 पशुओं को टैग किया गया. इनमें 2 लाख 67 हजार 143 गौवंशीय, 41 हजार 746 भैंस वंशीय तथा 282 नर बकरी/भेड़ शामिल हैं.
सरकार ने प्रत्येक पशुधन के लिए ईयर टैगिंग अनिवार्य की है. पशुसंवर्धन विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों से अपने पशुओं का ईयर टैगिंग कराने की अपील की जा रही है. विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी यह आवश्यक है.
ईयर टैगिंग होने पर प्राकृतिक आपदा, बिजली गिरने या वन्य प्राणियों के हमले में पशुधन की मृत्यु होने पर मालिक को मुआवजा मिल सकेगा. साथ ही खरीदबिक्री की प्रक्रिया भी आसान होगी. बिना ईयर टैगिंग के पशुधन की खरीदबिक्री संभव नहीं होगी.
शुरुआत में कई पशुपालकों में ईयर टैगिंग को लेकर उदासीनता थी, लेकिन जानकारी और जागरूकता के बाद उन्होंने स्वयं आगे आकर अपने पशुओं का टैगिंग कराया. इसी का परिणाम है कि अब तक जिले में 3.09 लाख पशुधन का ईयर टैगिंग पूरा किया जा चुका है.
जिले में 2 लाख 75 हजार 880 गौवंशीय पशु हैं, जिनमें से 2 लाख 12 हजार 33 पशुओं को मुंहपकाखुरपका एफएमडी रोग से बचाव के लिए टीका लगाया गया है. वहीं जिले में 46 हजार 649 भैंस वंशीय पशु हैं, जिनमें से 25 हजार 310 पशुओं को भी यह टीका दिया गया है.