प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Water Drilling: वर्धा जिले के सभी बोरवेल चालकों ने अपनी मांग को लेकर 26 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यही कारण है कि जिले में नई बोरवेल निर्माण का कार्य ठप पड़ गया है। पिछले नौ दिनों से यह हड़ताल चल रही है।
अब तक इस पर कोई हल नहीं निकल पाया है। उल्लेखनिय यह कि बोरवेल वाहन मालिक व एजंट के बीच चल रहे विवाद के कारण यह स्थिति पैदा होने की जानकारी है। वर्तमान स्थिति में सभी बोरवेल निर्माण करने वाले वाहन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय परिसर में खड़े कर दिए हैं।
हड़ताल में वर्धा जिला बोरवेल एसोसिएशन के अविनाश वंजारी, राजेश वंजारी, अंकुश डगवार, आशीष आष्टणकर, सुनील तलवेकर, मनोज वरघणे, अनिल जावंदिया सहित अन्य बोरवेल चालक शामिल हुए हैं। बोरवेल संचालकों के अनुसार वर्तमान में 4 इंच, 6 इंच और 7 इंच बोरवेल निर्माण के लिए उन्हें 90 से 100 रुपये प्रति फीट की दर मिल रही है,जो कई वर्षों से अपरिवर्तित है, वहीं महंगाई लगातार बढ़ रही है।
केसींग सहित अन्य सामग्री की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, साथ ही श्रमिकों की मजदूरी भी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में एजंट काफी बढ़ने के कारण वे परप्रांतिय बोरवेल चालकों से मिलिभगत कर कम रेट में बोरवेल का निर्माण कराते है।
परंतु इस कार्य में क्वालिटी न होने से ग्राहकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। यही वजह है कि बोरवेल चालकों पर ग्राहक अविश्वास जताते नजर आ रहे है। हमारी मांग है कि बोरवेल निर्माण के दर क्रमशः 110, 120 और 130 रुपये प्रति फीट की जाने चाहिए, ताकि बोरवेल चालकों को भारी नुकसान उठाना न पड़े।
वर्तमान में वर्धा जिले में बोरवेल निर्माण के कुल 17 वाहन हैं, जिनमें से 10 वाहन आंदोलन स्थल पर खड़े हैं। बोरवेल सेवा अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में आती है।
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यदि किसी ग्राहक को बोरवेल निर्माण की आवश्यकता है और वे मांग के अनुसार उचित मूल्य देने को तैयार हैं, तो हड़ताल के बावजूद रोटेशन पद्धति से बोरवेल निर्माण किया जाएगा, ऐसा भी बताया गया है।