प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Hawker Fee: वर्धा नगर परिषद द्वारा शहर के फेरीवालों से प्रति दिन 20 रूपए शुल्क वसूल किया जाता है। वास्तविक में फेरीवाले कम है। ज्यादातर लोगों ने फुटपाथ पर सड़क किनारे अपना व्यवसाय स्थापित किया है। गत वर्ष 29।53 लाख रुपयों का टेंडर दिया जाने से रकम वसूल होकर नप प्रशासन को आर्थिक लाभ हुआ।
फिर भी मार्केट व अन्य जगह फेरीवालों के लिए सुविधाओं का अभाव है। शहर के मार्केट परिसर व अन्य जगहों पर व्यवसाय करने वाले फेरीवालों की संख्या करीब 6 हजार से जादा होने की जानकारी नप प्रशासन द्वारा दी जा रही है।
अधिकृत पंजीयन करने वाले फेरीवालों की संख्या 1,210 हैं। जबकि सरकार द्वारा चलाई गई पीएम स्व्वानिधी योजना के माध्यम से कर्ज का लाभ 2 हजार 800 फेरीवालों ने अब तक लिया है।
फेरीवाला याने विविध भागों पर घुमकर व्यवसाय करनेवाला यह संकल्पना है। लेकिन फेरीवाले बहुत कम रह गए हैं। ज्यादातर फेरीवालों ने सड़क किनारे फुटपाथ पर अस्थायी रूप से दुकान लगा रखी है।
परिसर में सफाई व लाइट उपलब्ध करने के बदले में प्रति दिन 20 रूपयों के अनुसार शुल्क वसूल किया जाता है। पिछले वर्ष 29,53 लाख रुपयों का टेंडर दिया गया था। संबंधित ठेकेदार ने लाखों रुपए वसूल करने की जानकारी है।
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नगर परिषद प्रशासन को भी इसके माध्यम से अच्छी आर्थिक आय हुई है लेकिन जिसकी तुलना में नगर परिषद प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की उपाययोजना फेरीवालों के लिए नहीं की गई। अधिकांश जगह कचरा गाड़ी नहीं जाने से फेरीवाले कचरा सड़क किनारे ही फेंककर चले जाते है। जिससे शहर में अस्वच्छता फैल रही है।
फेरीवाली से 20 रूपए प्रति दिन के हिसाब से शुल्क वसूल किया जाता है। जिसका नगर परिषद प्रशासन ने द्वारा दिया टेंडर 31 मार्च 2026 को समाप्त हो जाएगा नए से दिए जानेवाले टेंडर में 10 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रावधान है। हॉकर्स से वसूल किए जानेवाले शुल्क में भी वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।