Maharashtra Tiger Conservation Fund: महाराष्ट्र में टाइगर संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास हैबिटेट के लिए निर्धारित 40.73 करोड़ से अधिक की राशि कथित रूप से अन्य कार्यों में उपयोग का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, यह फंड संरक्षित क्षेत्रों में टाइगर संरक्षण के लिए था, लेकिन इसे तेंदुआमानव संघर्ष और वन विभाग के कर्मचारियों के वेतन पर खर्च किया गया। परियोजनाओं से प्रभावित वन क्षेत्रों की भरपाई के लिए यह राशि प्रोजेक्ट डेवलपर्स से ली जाती है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यह फंड केवल टाइगर संरक्षण, आवास विकास और इकोडेवलपमेंट के लिए ही उपयोग होना चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार, 16.56 करोड़ जुन्नर क्षेत्र में तेंदुआ संघर्ष प्रबंधन पर खर्च किए गए। इसमें जाल, ट्रैप केज, जागरूकता बोर्ड, यूनिफॉर्म, प्रशिक्षण उपकरण, कैमरे और आग बुझाने का यंत्र शामिल हैं।
इस राशि में ठाणे से 7 करोड़, मेलघाट टाइगर रिजर्व से 7.33 करोड़ और सह्याद्री टाइगर रिजर्व से 2.17 करोड़ लिए गए। इसके अलावा 24.17 करोड़ प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम और रैपिड रिस्पॉन्स टीम के वेतन में खर्च किए गए। साथ ही 24.84 लाख सोशल फॉरेस्ट्री विभाग को भी ट्रांसफर किए गए, जिसका टाइगर संरक्षण से सीधा कोई संबंध नहीं है।
जिलेवार खर्च में अमरावती 87.67 लाख, चंद्रपुर 4.15 करोड़, संभाजी नगर 57.17 लाख, धुले 1.36 करोड़, गडचिरोली 2.35 करोड़, कोल्हापुर 14.83 लाख, नागपुर 4.82 करोड़, नाशिक 44 लाख, पुणे 76.42 लाख, ठाणे 2.32 करोड़, यवतमाल 47.49 लाख शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डायवर्जन नियमों का उल्लंघन है और इससे टाइगर संरक्षण प्रभावित हो सकता है। विदर्भ में बढ़ते मानववन्यजीव संघर्ष के बीच इस मुद्दे ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के अधिकांश व्याध्र प्रकल्प में करोड़ के फंड का ब्याज जमा है। यह ब्याज की राशि जुन्नर प्रादेशिक विभाग को तेंदुआ और मानव के बिच संघर्ष रोकने के लिए दें दिया है। एक ही प्रादेशिक वन्य विभाग को मंत्रालय स्तर पर यह निधि देने से अन्य प्रादेशिक वन विभाग के प्रति अन्याय हुआ है।
इस भेदभाव पूर्ण रवैये से विशेष कर विदर्भ का बड़ा नुकसान हुआ है। चंद्रपुर में करीब 34 लोगों पर बाघों ने हमले करने कि घटना हुई है,वही मेलघाट में करीब 8 वारदात हुई है। इतना गंभीर विषय होने के बावजूद शासन और प्रशासन पूरी तरह दुर्लक्षित होने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।