भीषण गर्मी में वन विभाग ने शुरू की जलस्रोत भरने की मुहिम, येवला के ममदापुर अभयारण्य में वन्यजीवों को राहत
Yevla Mamdapur Forest Sanctuary : येवला के ममदापुर वन क्षेत्र में गर्मी के कारण सूखते जलस्रोतों को देखते हुए वन विभाग ने टैंकरों से कृत्रिम जलाशयों में पानी भरने की मुहिम शुरू की है।
- Written By: अंकिता पटेल
Yevla Wildlife Water Supply Summer( सोर्स: सोशल मीडिया )
Yevla Wildlife Water Supply Summer: येवला भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए येवला तालुका के ममदापुर वन संरक्षण क्षेत्र में वन विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से कृत्रिम जलस्रोतों में पानी भरने का कार्य शुरू किया गया है।
इस सुरक्षित वन क्षेत्र में काले हिरण (चिंकारा), नीलगाय, भेड़िया और तेंदुए जैसे 7 हजार से अधिक वन्यजीव निवास करते हैं। सूखते कंठों के लिए ‘वॉटर नेटवर्क’ वर्तमान में वन क्षेत्र में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम हैं।
क्षेत्र में 15 प्राकृतिक, 20 कृत्रिम और सौर ऊर्जा पंपों से चलने वाले 25 जलस्रोत उपलब्ध है। गर्मी की तीव्रता के कारण प्राकृतिक जलस्रोतों का
स्तर घटने लगा है, जिसे देखते हुए वन विभाग अब कृत्रिम जलाशयों में टैंकरों से जलापूर्ति कर रहा है।
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वन परिक्षेत्र अधिकारी राहुल घुगे के नेतृत्व में गोपाल हरगावकर और पंकज नागपुरे सहित अन्य कर्मचारी नियमित रूप से जंगलों में गश्त कर रहे हैं ताकि कहीं भी पानी की कमी न रहे।
बस्तियों की ओर पलायन पर रोक
अधिकारियों का मानना है कि यदि जंगल के भीतर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा, ती वन्यजीव भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर नहीं आएंगे, इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा और शिकार जैसी घटनाओं पर भी लगाम लगेगी।
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ममदापुर में खिला ‘पीला पलाश’
इस गमर्मी के मौसम में ममदापुर वन क्षेत्र एक खास वजह से चर्चा में है। नासिक जिले में पीला पलाश’ बहुत कम पाया जाता है। पूरे वन क्षेत्र में खिले पारंपरिक लाल-नारंगी पलाश के बीच यह दुर्लभपीला फूल पर्यटकों और वनस्पति शास्त्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
