पुणे के दिग्विजय बने ‘महाराष्ट्र केसरी’ (सौजन्य-नवभारत)
Digvijay Bhondve Wrestler Pune: वर्धा जिले के देवली में आयोजित ग्रीको-रोमन शैली की प्रतिष्ठित ‘महाराष्ट्र केसरी’ कुश्ती प्रतियोगिता बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस रोमांचक प्रतियोगिता में पुणे के पहलवान दिग्विजय भोंडवे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘महाराष्ट्र केसरी’ का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में दिग्विजय भोंडवे का सामना बुलढाणा के पहलवान अक्षय शेलके से हुआ।
यह मुकाबला बेहद रोमांचकारी रहा, लेकिन दिग्विजय ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 8-0 के अंतर से जीत दर्ज कर विजेता का खिताब हासिल किया। कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष संजय गाते, महिला आघाड़ी अध्यक्ष वैशाली येरावार, आबा काले, संदीप अप्पा भांडवे, संजय तिरथकर, उपाध्यक्ष राहुल चोपड़ा, तहसीलदार समर्थ क्षीरसागर, एसएमडब्ल्यू इस्पात के अधिकारी शाम मुंदड़ा, दीपक सुमध, नगरसेवक अनिल कारोटकर सहित देवली नगर परिषद के सभी पार्षद और बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. भोयर ने आश्वासन दिया कि खिलाड़ियों को आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में कुश्ती और कबड्डी जैसी खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम की सफलता के लिए रविंद्र कारोटकर, उमेश कामडी, सौरभ कडू, शुभम तर्हेकर, वसंत धोटे सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने विशेष योगदान दिया।
विजेता दिग्विजय भोंडवे को चांदी की गदा और नगद पुरस्कार आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और वर्धा जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर के हाथों प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी डॉ. पंकज भोयर ने की। इस अवसर पर पूर्व सांसद रामदास तडस का जन्मदिन भी समारोहपूर्वक मनाया गया। उन्हें अशोक उईके, डॉ. पंकज भोयर और विधायक राजेश बकाने के हाथों गदा भेंट कर सम्मानित किया गया।
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आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने कहा कि आदिवासी युवाओं में अपार शारीरिक क्षमता होती है, जिसे खेलों की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने यवतमाल में 50 एकड़ भूमि पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक खेल अकादमी स्थापित करने की घोषणा की।
प्रतियोगिता के आयोजक रामदास तडस ने अपने प्रास्ताविक भाषण में कहा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संरक्षण बेहद जरूरी है। जब तक खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं और संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना मुश्किल होगा।