'क्या हुआ तेरा वादा?' किसानों के लिए आज शिवसेना का ट्रैक्टर मोर्चा, दानवे के हाथ में होगी स्टेयरिंग!

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। किसानों के मुद्दों को लेकर शिवसेना आक्रामक हो गई है। आज जिला स्तर पर चक्का जाम किया जाएगा
शिवसेना का सरकरार के खिलाफ ट्रैक्टर मोर्चा
शिवसेना का सरकरार के खिलाफ ट्रैक्टर मोर्चा
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मुंबई: महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बेमौसम की मार से परेशान किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है। उन्हें फसलों पर उचित समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल रहा है। सरकार की वादाखिलाफी इसकी बड़ी वजह है।

सरकार 2024 विधानसभा चुनाव से पहले किए गए अपने वादे पूरे नहीं कर रही है। ऐसे आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अब आक्रामक हो गई है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) ने गुरुवार को तालुका स्तर पर चक्का जाम करने तथा ट्रैक्टर मोर्चा निकालने का ऐलान किया है।

विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने इस बारे में कहा कि 'क्या हुआ तेरा वादा?' अभियान के तहत मराठवाड़ा के 68 तालुकों की 4590 से अधिक ग्राम पंचायतों से सरकार को ज्ञापन देकर सवाल पूछे गए हैं। साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों को भी शिवसैनिकों द्वारा ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसी तरह 1080 ग्राम सभाओं के माध्यम से भी सरकार को घेरने की तैयारी यूबीटी ने की है।

चुनावी वादों की दिलाई याद

दानवे ने याद दिलाया कि सरकार ने 2024 विधानसभा चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी, किसान सम्मान योजना, 'लाडली बहन' योजना में 2100 रुपए, 45,000 गांवों में सड़कें, ‘अन्नदाता ऊर्जादाता’, फसलों को समर्थन मूल्य, खाद पर जीएसटी सब्सिडी की वापसी, एक रुपए में फसल बीमा जैसी कई वादों के ढोल पीटे, लेकिन सत्ता में आते ही ये सब वादे भुला दिए गए हैं। सरकार में आते ही सरकार के एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों ने जनता को धोखा दिया है।

सरकार ने गिरगिट की तरह बदले रंग

दानवे ने आरोप लगाया कि सरकार ने गिरगिट को भी शर्मिंदा कर देने वाली तेजी से रंग बदला। वित्त वर्ष के अंत में किसानों को कर्ज चुकाने के लिए कहकर उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने उनकी भावनाओं के साथ मजाक किया। इसका नतीजा यह है कि पिछले सात महीनों में राज्य में १,००० से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली है। दानवे ने कहा कि किसान से जीएसटी के माध्यम से जो रकम सरकार को मिलती है, उसे सब्सिडी के रूप में लौटाने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हुआ। कपास और सोयाबीन जैसी फसलों के दाम गिराने के लिए सरकार विदेश से आयात के आदेश निकाल रही है। किसान सम्मान योजना की राशि १२ हजार से १५ हजार रुपये करने का वादा केवल दिखावा रहा।

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