ऑपरेशन टाइगर की अटकलों के बीच मातोश्री पहुंचे केवल चार सांसद, उद्धव की टॉप सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
Shivsena UBT MP Meeting: ऑपरेशन टाइगर के दावों के बीच मातोश्री पर उद्धव ठाकरे की सीक्रेट मीटिंग संपन्न। केवल 4 सांसद पहुंचे, 5 ऑनलाइन जुड़े। जानें संजय राउत ने क्या दिया स्पष्टीकरण।
- Written By: गोरक्ष पोफली
संजय राउत और उद्वव ठाकरे मीटिंग सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Matoshree Secret Meeting Shivsena: महाराष्ट्र की राजनीति में 14 जून 2026 का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। एक तरफ जहाँ एकनाथ शिंदे गुट के ऑपरेशन टाइगर और सांसदों के टूटने की अफवाहें उड़ीं, वहीं उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने निवास मातोश्री पर सांसदों की बैठक बुलाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
अफवाहों का खंडन और एकजुटता
बैठक से पहले राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि ठाकरे गुट के कुछ सांसद नॉट रिचेबल हैं और वे पाला बदल सकते हैं। हालांकि, सांसद संजय राउत ने इन सभी चर्चाओं को केवल अफवाह करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के सभी 9 सांसद पूरी तरह से एकजुट हैं और उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।
बैठक में सांसदों की उपस्थिति दो तरीके से रही
दक्षिण मुंबई के अरविंद सावंत, दक्षिण-मध्य मुंबई के अनिल देसाई, नासिक के राजाभाऊ वाजे और पूर्व-उत्तर मुंबई के संजय दीना पाटील व्यक्तिगत रूप से मातोश्री पहुँचे। कौटुंबिक और स्वास्थ्य कारणों से 5 सांसदों ने डिजिटल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर, संजय देशमुख, नागेश पाटील-आष्टीकर और संजय जाधव शामिल थे।
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संजय राउत ने बताया कि यह एक नियमित बैठक थी और जो सांसद आज नहीं आ सके, वे अगले दो-तीन दिनों में व्यक्तिगत रूप से ठाकरे से मुलाकात करेंगे।
अन्य राजनीतिक घटनाक्रम
स्रोतों के अनुसार, महाराष्ट्र की राजनीति में अन्य मोर्चों पर भी हलचल जारी है। सोलापुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा को समर्थन देने के मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिस पर प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने प्रतिक्रिया दी है। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की राजनीति इस समय आरोप-प्रत्यारोप और अपनी-अपनी किलेबंदी को मजबूत करने के दौर से गुजर रही है।
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खुद को मजबूत करने में जुटी हैं सभी पार्टियां
अब असल सवाल यह है कि जो सांसद आज मातोश्री न पहुंचकर केवल ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, क्या वे आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे के सामने हाजिर होंगे या अचानक देवेंद्र फडणवीस के ‘वर्षा’ बंगले पर दस्तक देकर महाविकास अघाड़ी की धड़कनें बढ़ा देंगे? फिलहाल महाराष्ट्र में सभी पार्टियां खुद को मजबूत करने में जुटी हैं। एक तरफ शिंदे गुट के नेता जमीन पर उतरकर शहर-शहर घूम रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा का आक्रामक विस्तार जारी है। ऐसे सियासी माहौल में विपक्षी दलों के लिए अपने कुनबे को सुरक्षित और एकजुट रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
