पुणे में CM फडणवीस के आदेश के बाद भी PMRDA में UDCPR अटकी, नगर विकास विभाग की चुप्पी से विकास ठप

Pune Development News: मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्देश और पीएमआरडीए के प्रस्ताव के बावजूद नगर विकास विभाग ने यूडीसीपीआर पर रोक लगाई; 600 से अधिक गांवों का बुनियादी ढांचागत विकास प्रभावित।
Implementation of UDCPR in Pune PMRDA delayed as Urban Development Department holds back approval despite direct orders from CM Devendra Fadnavis, stalling growth.
देवेंद्र फडणवीस , एकनाथ शिंदे (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Pune PMRDA UDCPR Implementation: पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) क्षेत्र में 'एकीकृत विकास नियंत्रण और प्रोत्साहन नियमावली' (यूडीसीपीआर) को लागू करने में हो रहा विलंब अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने और पीएमआरडीए द्वारा औपचारिक प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नियंत्रण वाले नगर विकास विभाग ने इस पर अभी तक अंतिम मुहर नहीं लगाई है। नीतिगत निर्णयों में दिख रहे इस परोक्ष मतभेद का सीधा असर पुणे के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर पड़ रहा है।

चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित लाभ

वर्तमान में संपूर्ण पीएमआरडीए क्षेत्र में यूडीसीपीआर लागू न होने से विकास की गति बाधित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे समय पर लागू किया जाता, तो संबंधित क्षेत्रों का कायाकल्प बेहद तीव्र गति से होता। हालांकि, सरकार ने वर्ष 2023 में म्हालुंगे, माण, हिंजवडी, मांजरी खुर्द और वाघोली जैसे चुनिंदा क्षेत्रों की 'एकीकृत नगर वसाहत परियोजनाओं' (टाउनशिप) के लिए इसे मंजूरी दे दी थी, परंतु पीएमआरडीए का एक बड़ा हिस्सा आज भी इस व्यापक नियमावली के लाभ से वंचित है।

'यूडीसीपीआर' से मुख्य लाभ

  • भूखंडधारकों को राहतः छोटे भूखंडधारकों को निर्माण कार्यों में विशेष सहूलियत।
  • अवैध निर्माण पर रोकः सुगठित नियमों से अनधिकृत निर्माण के जाल से बचाव।
  • ढांचागत विकासः निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। 'डेवलपमेंट फीस' से होने वाली आय में वृद्धि होगी।
  • संसाधनों का इष्टतम उपयोगः बढ़े हुए एफएसआई और टीडीआर की अनुमति, साइड मार्जिन व विभिन्न घटकों में नियमानुसार छूट मिलेगी।
  • अनिवार्यता में छूटः एमेनिटी स्पेस की बाध्यता समाप्त होने से विकास प्रक्रियाओं को सुगमता मिलेगी।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और इसकी वर्तमान स्थिति

पीएमआरडीए का कार्यक्षेत्र लगभग 7,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसके अंतर्गत 600 से अधिक गांव आते हैं। इस विशाल क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए 21 नवंबर 2018 को एक निर्माण नियंत्रण नियमावली लागू की गई थी। इसके बाद, 2 जुलाई 2021 को एक ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान (डीपी) जारी किया गया, लेकिन कानूनी एवं न्यायिक विवादों के कारण इसे रद्द करना पड़ा।

इस गतिरोध को दूर करने के लिए 12 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से सपूर्ण पीएमआरडीए क्षेत्र में यूडीसीपीआर लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

इस निर्णय के अनुपालन में, प्राधिकरण ने 8 अप्रैल 2025 को विस्तृत प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा। इसके बाद 5 मई 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के कार्यवृत्त में भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।

ड्राफ्ट डीपी रद्द होने के बाद अब केवल 'क्षेत्रीय डेवलपमेंट प्लान' 66 (आरपी) ही प्रभावी है। नियमानुसार जहा आरसी लागू होता है, यहां यूडीसीपीआर स्वतः प्रभावी हो जाना चाहिए, ऐसे में मुख्यमंत्री के सीधे आदेश के बाद भी नगर विकास विभाग द्वारा प्रस्ताव को रोके रखना बेहद चौंकाने वाला है।

सुधीर कुलकर्णी, अध्यक्ष, नागरिक अधिकार संस्था

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