
अमरावती के मासोद में वनीकरण विभाग की ओर से बिना कांटों वाले कैक्टस का रोपण (सोर्स: नवभारत)
Amravati Social Forestry Department: अमरावती जिले के ग्राम पंचायत मासोद स्थित डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर रोपवाटिका में सामाजिक वनीकरण विभाग की ओर से बिना कांटों वाले ‘कैक्टस’ (निवडुंग) की चारा उपयोगी प्रजाति का रोपण किया गया। राजमाता जिजाऊ मासाहेब एवं स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर इस अभिनव उपक्रम को अंजाम दिया गया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुधन के लिए चारा कमी को दूर करना और पड़ी हुई भूमि का उचित उपयोग करना है। इस अवसर पर विभागीय आयुक्त कार्यालय के अधीक्षक कृषि अधिकारी नीलेश ठोंबरे, पशु चिकित्सा अधिकारी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भालचंद्र गावंडे, प्रवीण गुल्हाने सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विशेष रूप से यह भी बताया गया कि अमरावती जिले 3 किलो कैक्टस से लगभग 3.38 स्क्वेयर फीट लेदर तैयार किया जा सकता है, जिसका उपयोग जूते, चप्पल और बैग बनाने में किया जाता है। इस प्रकार कैक्टस न केवल चारा संकट का समाधान है, बल्कि रोजगार और आय के नए अवसर भी उपलब्ध करा सकता है।
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उन्होंने कहा कि यह केवल एक पौधारोपण नहीं, बल्कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए एक वरदान है । जहां कुछ भी उगाना संभव नहीं होता, वहां पड़ी भूमि पर कैक्टस लगाकर पशुओं के चारे की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है। कैक्टस में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण पशुओं की पानी की जरूरत भी आंशिक रूप से पूरी होती है। प्रत्येक गांव में इस प्रजाति की खेती करना समय की मांग है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बिना कांटों वाला कैक्टस अत्यंत कम पानी में, पहाड़ी क्षेत्रों और खराब भूमि पर भी तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है, जहां अन्य फसलें या फलदार पेड़ नहीं पनप पाते यह पौधा भूजल स्तर बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। महाराष्ट्र में गर्मियों के दौरान महसूस होने वाली चारा कमी को दूर करने के लिए बिना कांटों वाला कैक्टस एक क्रांतिकारी वनस्पति साबित हो सकता है।






