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उत्तन क्षेत्र की विकास योजना पर ग्रामीणों का विरोध तेज़, एमआरटीपी अधिनियम के तहत 60 दिन की माँग

Mira-Bhayander News: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका द्वारा पाँच गाँवों उत्तन, पाली, चौक, तरोड़ी और डोंगरी के लिए जारी की गई विकास योजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में तीव्र असंतोष फैल गया है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Oct 23, 2025 | 06:45 PM

कत्लखाना आरक्षण पर भी विवाद (सौजन्यः सोशल मीडिया)

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Thane News: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका द्वारा भाईंदर पश्चिम के पाँच गाँवों उत्तन, पाली, चौक, तरोड़ी और डोंगरी के लिए जारी की गई विकास योजना (D P) को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में तीव्र असंतोष फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना को समझने और आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए मनपा प्रशासन द्वारा दी गई 30 दिन की अवधि अपर्याप्त है और इसे एमआरटीपी अधिनियम की धारा 26 के अनुसार 60 दिन तक बढ़ाया जाना चाहिए। इस संदर्भ में मनपा के नगर रचना विभाग के सहायक निदेशक पुरुषोत्तम शिंदे ने बताया कि निर्धारित 30 दिन के अंदर जितने दिन मनपा के कामकाज बंद या अवकाश दिवस थे, उतने दिन की अवधि बढ़ाई जाएगी।

मीरा-भाईंदर मनपा आयुक्त एवं प्रशासक राधाविनोद शर्मा ने 24 सितंबर को विकास योजना का मसौदा प्रकाशित किया था।इस पर आपत्तियाँ और सुझाव दर्ज कराने के लिए 24 अक्टूबर तक की अवधि निर्धारित की गई थी। यह समयसीमा पूर्ण हो चुकी है, जिसके बाद ग्रामीणों ने औपचारिक रूप से अवधि बढ़ाने की माँग मनपा आयुक्त को सौंपी है।

30 दिन की समयसीमा पर विवाद

ग्रामीणों का तर्क है कि त्योहारों के मौसम में मनपा कार्यालय कई दिनों तक बंद रहा, जिससे नागरिकों को वास्तविक रूप से बहुत कम कार्य दिवस मिले। इस वजह से योजना का अध्ययन और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। पूर्व पार्षद शर्मिला बगाजी और स्थानीय मछुआरों के नेता बर्नाड डिमेलो ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि प्रशासन को कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए आपत्ति अवधि को 60 दिन तक बढ़ाना चाहिए, ताकि हर नागरिक अपनी राय व्यक्त कर सके।

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एमआरटीपी अधिनियम का हवाला

ग्रामीणों ने बताया कि महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन (एमआरटीपी) अधिनियम, 1966 की धारा 26 के अनुसार किसी भी विकास योजना के मसौदे पर आम जनता से आपत्तियाँ और सुझाव प्राप्त करने के लिए कम से कम 60 दिन का समय दिया जा सकता है। हालांकि मनपा के नगर रचना विभाग के सहायक निदेशक पुरुषोत्तम शिंदे ने स्पष्ट किया कि 2011 की जनगणना के अनुसार मीरा-भाईंदर की जनसंख्या लगभग 8 लाख है, और 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 30 दिन की अवधि ही विधिसम्मत मानी जाती है।

योजना के मुख्य बिंदु

इस विकास योजना में कई सार्वजनिक और नागरिक सुविधाओं के आरक्षण प्रस्तावित किए गए हैं । जिनमें नई सड़कें और मार्ग विस्तार, मछली बाजार एवं कोल्ड स्टोरेज,खेल के मैदान, अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र,पर्यटन केंद्र एवं मेट्रो कार शेड, डंपिंग ग्राउंड के लिए आरक्षण साथ ही अविकसित क्षेत्रों को घटाकर आवासीय क्षेत्रों को बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि यह योजना नागरिकों की बढ़ती ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

अंग्रेज़ी में घोषणा पर आपत्ति

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विकास योजना की घोषणा और दस्तावेज़ अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित किए गए हैं, जिससे स्थानीय मराठी भाषी लोगों को दस्तावेज़ समझने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने माँग की है कि योजना को मराठी भाषा में पुनः प्रकाशित किया जाए, ताकि सभी नागरिक अपनी आपत्तियाँ प्रभावी ढंग से दर्ज करा सकें

ये भी पढ़े: Thane: आरएसएस विवाद पर सियासत तेज, शिंदे बोले- संघ की साख अटूट और राष्ट्रवादी

कत्लखाना आरक्षण पर तीखा विरोध

योजना में आरक्षण क्रमांक 30 के तहत उत्तन क्षेत्र में कत्लखाना का प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने कड़ा विरोध जताया है।ग्रामीणों का कहना है कि उत्तन क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील है। यहाँ कत्लखाना बनाना स्थानीय भावनाओं को आहत करेगा और पारंपरिक जीवनशैली पर असर डालेगा।

एमएमआरडीए की रद्द योजना के बाद नई पहल

इससे पहले राज्य सरकार ने इन पाँच गाँवों को विशेष पर्यटन क्षेत्र घोषित किया था, और विकास योजना तैयार करने की ज़िम्मेदारी एमएमआरडीए (मुंबई महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण) को दी थी, लेकिन ग्रामीणों के तीव्र विरोध के बाद वह योजना रद्द कर दी गई थी। अब मनपा द्वारा जारी नई योजना में पुराने विवादित आरक्षण फिर से शामिल किए जाने पर ग्रामीणों में निराशा और अविश्वास बढ़ गया है।

ग्रामीणों की माँगें और चेतावनी

ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना “ विकास नहीं, विनाश की राजनीति ” है। उनका आरोप है कि इससे स्थानीय लोगों की भूमि, पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली को खतरा है। उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं आपत्तियों और सुझावों की अवधि 60 दिन तक बढ़ाई जाए,योजना मराठी भाषा में प्रकाशित की जाए,कत्लखाना आरक्षण (क्रमांक 30) तुरंत रद्द किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे व्यापक आंदोलन और कानूनी लड़ाई शुरू करेंगे।

Villagers intensify their opposition to development plan for the uttan area

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Published On: Oct 23, 2025 | 06:45 PM

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