Ulhasnagar News: अवैध निर्माणों के कारण वालधुनी नदी का तट हो रहा संकरा, पर्यावरण प्रेमियों ने जताई चिंता
Ulhasnagar Illegal Construction: उल्हासनगर में वालधुनी नदी के किनारे हो रहे अवैध निर्माण और सीवेज पाइपलाइन कार्य में अनियमितताओं को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने महापौर को पत्र देकर जांच और कार्रवाई की म
- Written By: आंचल लोखंडे
sewage pipeline controvers (सोर्सः सोशल मीडिया)
Valdhuni River Encroachment: मनपा क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में ड्रेनेज सीवेज पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कई स्थानों पर यह कार्य अभी भी प्रगति पर है। शहर के विभिन्न वार्डों की पाइपलाइन को नदी के पास स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाया जा रहा है, ताकि वहां उस पर प्रक्रिया की जा सके। इसी क्रम में रेल पटरियों के पास बहने वाली वालधुनी नदी के किनारे-किनारे ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि पहले से ही नदी किनारे हो रहे अवैध निर्माणों के कारण नदी का पात्र लगातार छोटा होता जा रहा है और पाइपलाइन के कार्य में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उनका कहना है कि मनपा प्रशासन को इस कार्य के प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए और निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पाइपलाइन कार्य में अनियमितता का लगाया आरोप
इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को स्थानीय समाजसेवी शिवाजी रगड़े, फिरोज खान और वालधुनी बिरादरी के शशिकांत दायमा ने आयुक्त और अश्विनी निकम को लिखित निवेदन देकर गहन जांच की मांग की। महापौर से प्रत्यक्ष भेंट कर उन्होंने बताया कि बरसात के समय नदी का प्रवाह तेज होता है और भारी मात्रा में पानी जमा होता है। जिस तरह से पाइपलाइन डालने का काम किया जा रहा है, वह घटिया दर्जे का प्रतीत होता है और एक ही बारिश में बह जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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महापौर को पत्र
उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य से नदी का पात्र संकुचित हो रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में जलभराव की संभावना बढ़ सकती है। पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद नदी के पात्र में बिना किसी अनुमति के कार्य किया जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है।
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अवैध निर्माणों पर भी सख्ती और अंकुश
समाजसेवी शिवाजी रगड़े का कहना है कि वे सीवेज लाइन के काम के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रशासन को उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही नदी किनारे हो रहे अवैध निर्माणों पर भी सख्ती से अंकुश लगाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बरसात के दौरान नदी किनारे रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुस सकता है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है और सरकार को भी मुआवजे के रूप में लाखों रुपये देने पड़ते हैं।
