Mahavir Jain Hospital (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mahavir Jain Hospital Thane: सड़क हादसे का शिकार हुए एक मरीज जो ब्रेन डेड की वजह से स्वयं तो नहीं बच पाए लेकिन उनकी वजह से 9 लोगों को नया जीवन मिला है। बताया गया कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 33 साल के एक व्यक्ति को ठाणे के श्री महावीर जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद ब्रेन हेमरेज की वजह से सुधार नहीं हो सका, आखिरकार उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा। परन्तु इसके पहले महावीर जैन हॉस्पिटल की कोशिश से उसके परिवार की सहमति से अंगदान का निर्णय लिया गया।
उक्त व्यक्ति के अंगदान से 9 लोगों को नया जीवन मिला है। ठाणे के हजूरी स्थित श्री महावीर जैन हॉस्पिटल के ट्रस्टी अजय आशर ने बताया कि इस कार्य में अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. रणवीर कोष्टी का अहम रोल रहा। 23 मार्च की रात सड़क हादसे के बाद से उस व्यक्ति का एक निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन किया गया। मरीज़ को 27 मार्च को आगे के इलाज के लिए श्री महावीर जैन हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया था। क्लिनिकल जांच में मरीज़ के ब्रेन स्टेम रिफ्लेक्सेस नहीं पाए गए और एपनिया टेस्ट के बाद मरीज़ को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
इसके बाद रिश्तेदारों की सहमति से ज़ोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन कमेटी से संपर्क कर शरीर के अन्य अंगो को डोनेट करने का निर्णय लिया गया। 29 मार्च को श्री महावीर जैन हॉस्पिटल में ऑर्गन रिट्रीवल हुआ। दान के लिए दिल, 2 किडनी, लिवर, पैंक्रियास, कॉर्निया, बोन ब्रोथ जैसे हिस्से इकट्ठा करने के लिए मुंबई के विभिन्न अस्पतालों से संपर्क किया गया।
लिवर को दो हिस्सों में बांटा गया था. इसे स्प्लिट लिवर कहते हैं। उसे केईएम और अपोलो अस्पताल भेजा गया। यह जानकारी एक पत्रकार परिषद में दी गई। इस मौके पर श्री महावीर जैन अस्पताल के ट्रस्टी अजय आशर, महेश राजदरेकर, डॉ. रणवीर कोष्टी समेत डाक्टरों की टीम मौजूद थी।
विशेष रूप से इस पहल की वजह से एक 9 वर्षीय मरीज का सफल लिवर प्रत्यारोपण हुआ। ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से 24 घंटे के भीतर दिल, लिवर और किडनी भेज दिए गए। इसके बाद इन सभी अंगों को संबंधित अस्पतालों के अनुसार 9 मरीजों में तत्काल प्रत्यारोपित किया गया। पूरी प्रक्रिया को 40 डॉक्टरों की एक टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
ये भी पढ़े: 2.73 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरा सोलर प्रकल्प, अर्जुनी-मोरगांव जलापूर्ति योजना पर उठे सवाल
ब्रेन डेथ के बारे में डॉक्टरों ने कहा कि 100 प्रतिशत ब्रेन डेड घोषित करने के बाद, रिश्तेदारों से सहमति प्राप्त करने के बाद ही मरीज को मृत घोषित किया जाता है। उनकी टीम द्वारा निरीक्षण के बाद ही अगली प्रक्रिया पारित की जाती है जो सरकार को पूरी जानकारी देती है।अंग दान की घोषणा के बाद, एच.एन. रिलायंस अस्पताल, मैक्स नानावटी अस्पताल, केईएम अस्पताल, नानावटी अस्पताल, सहियारा आई बैंक को दोनों कॉर्निया ये अंग भेजे गए।
किडनी ट्रांसप्लांट सबसे ज़्यादा डिमांड वाला ऑर्गन डोनेशन है, जिसमें लगभग 60,000 से 70,000 मरीज इंतज़ार कर रहे हैं। फिर लिवर और फेफड़ों वाले मरीज़ आते हैं। लाखों मरीज़ इन अंगों का इंतज़ार कर रहे हैं।
श्री महावीर जैन हॉस्पिटल के ट्रस्टी अजय अशर ने कहा, “हमारा हॉस्पिटल मरीज़ों को बहुत कम खर्च पर इलाज और सुविधाएं दे रहा है। हॉस्पिटल मरीज़ों की अच्छी सेवाओं के लिए तैयार है। डॉक्टरों की टीम से अच्छा सहयोग मिल रहा है।अंगदान को बढ़ावा देने के लिए ठाणेकरों को आगे आने की ज़रूरत है। हम अपने हॉस्पिटल के ज़रिए गरीब एवं जरूरतमंद मरीज़ों को सुविधाएं देने की कोशिश कर रहे हैं।