2.73 करोड़ खर्च के बाद भी अधूरा सोलर प्रकल्प, अर्जुनी-मोरगांव जलापूर्ति योजना पर उठे सवाल

Arjuni Morgaon Water Supply Scheme: गोंदिया के अर्जुनी मोरगांव में 2।73 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद प्रादेशिक जलापूर्ति योजना का सोलर प्रकल्प एक साल बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है।
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Arjuni Morgaon Water Supply Scheme (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Rural Water Crisis Gondia: अर्जुनी मोरगांव तहसील के हजारों लोगों की लाइफलाइन मानी जाने वाली अर्जुनी मोरगांव प्रादेशिक जलापूर्ति योजना में लगा करोड़ों रुपए का सोलर पावर प्रकल्प एक साल बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है, जिससे प्रशासन के नियोजन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बिजली का खर्च कम करने के उद्देश्य से लगाया गया यह प्रकल्प अब योजना पर आर्थिक बोझ बनता जा रहा है और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि 1 करोड़ 54 लाख रु। का बिजली बिल बकाया है।

जलजीवन मिशन के तहत, राज्य और केंद्र सरकार ने 'हर घर जल' संकल्पना के तहत जिला परिषद के माध्यम से 'ऑन-ग्रिड सोलर' सिस्टम लगाने के लिए 2 करोड़ 73 लाख 90 हजार 697 रुपए का निधि मंजूर की थी। 2022 में प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद, ठेकेदार ने काम पूरा दिखाया। लेकिन, असल में, इस योजना को अभी तक सोलर प्रकल्प से बनी बिजली का आर्थिक फायदा नहीं मिला है। सोलर प्रकल्प से बनी बिजली के बिलिंग समायोजन (नेट-मीटरिंग) के लिए बिजली वितरण कंपनी और जिला परिषद के बीच जो एग्रीमेंट जरूरी है, वह आज तक पूरा नहीं हुआ है।

2.73 करोड़ रूपए हुए खर्च

यह बात सामने आई है कि प्रशासकीय मंजूरी, तकनीकी जांच व कागजात पूरे होने में देरी के कारण बनी बिजली का इस्तेमाल होने के बावजूद योजना को उसका आर्थिक हिसाब नहीं मिल पा रहा है। पिछले 15 वर्षों से चल रही यह प्रादेशिक जलापूर्ति योजना ग्रामीण परिसर के लिए पानी का मुख्य सोर्स है। लेकिन, सोलर प्रकल्प, जिसे कागज पर पूरा दिखाया गया है, असल में बचत के बजाय कर्ज का पहाड़ बढ़ा रहा है, तो क्या योजना पूरी है या सिर्फ दिखावे के लिए? ऐसा सवाल किया जा रहा है।

योजना कागजों तक सीमित रहने का डर

स्थानीय नागरिक और ग्राम पंचायतें मांग कर रहे हैं कि संबंधित विभाग तुरंत नेट-मीटरिंग एग्रीमेंट पूरा करें, सोलर प्रकल्प को लागू करें, बिजली बिलों के बकाए का कोई रास्ता निकालें और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच करें। डर जताया जा रहा है कि अगर गर्मी शुरू हो गई है, तो प्रशासन ने तुरंत कोई फैसला नहीं लिया, तो 'हर घर जल' की घोषणा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

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