(प्रतीकात्मक तस्वीर)
Illegal Bangladeshi Citizens Sentenced: महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक स्थानीय अदालत ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने और बिना वैध दस्तावेजों के रहने के आरोप में तीन बांग्लादेशी नागरिकों को सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.एस. भाकरे ने 1 अप्रैल को इस मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को 14 महीने के कारावास की सजा दी।
सजा पाने वाले आरोपियों में जाहिद ऐनल खान (23), सपना मदन सिकदर (31) और जुइथी जहांगीर ढाली (25) शामिल हैं। इन तीनों को पिछले साल 28 फरवरी को मुंब्रा-पनवेल रोड पर उत्तरशिव नाका के पास एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त इनके पास भारत में रहने के लिए कोई भी वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं पाया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। अदालत ने उन्हें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम 1950 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, एक दिलचस्प कानूनी मोड़ में, न्यायाधीश ने उन्हें विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) की धारा 14A के आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि “रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि जिस स्थान पर आरोपी पाए गए थे, उसे सरकार द्वारा ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया गया था। इसलिए, विदेशी अधिनियम के कड़े प्रावधान उन पर लागू नहीं होते।”
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अदालत ने प्रत्येक दोषी पर जुर्माना भी लगाया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि जैसे ही इन तीनों की 14 महीने की जेल की सजा पूरी होती है, उन्हें तुरंत कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस उनके देश (बांग्लादेश) प्रत्यर्पित कर दिया जाए। तब तक इन्हें हिरासत में ही रखा जाएगा।
यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सीमा पार कर अवैध रूप से भारतीय शहरों में छिपकर रह रहे हैं। ठाणे और मुंब्रा जैसे इलाकों में पुलिस लगातार ऐसे संदिग्धों की पहचान करने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाती रहती है।