पानी बचाने पर मिलेंगे एक्वाक्रेडिट्स: महाराष्ट्र सरकार का क्रांतिकारी वॉटर बैलेंस शीट प्रोजेक्ट
Water Balance Sheet: राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने वॉटर ऑडिट और बैलेंस शीट के जरिए जल संरक्षण की इस पायलट स्कीम की घोषणा की है। जानें कैसे पानी बचाने वालों को मिलेगा एक्वाक्रेडिट्स का लाभ।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: गोरक्ष पोफली
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: फाइल फोटो)
Pani Satbara Water Audit: पानी की बढ़ती समस्या को देखते हुए पानी की बचत के साथ जल व्यवस्थापन के लिए अब देश में पहली बार महाराष्ट्र में जमीन सातबारा की तरह ‘पानी सातबारा’ डेवलप करने का प्लान है। रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय में रेवेन्यू, वॉटर सप्लाई-सैनिटेशन, रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी के साथ हुई मीटिंग में इसका निर्णय लिया गया है।
जल व्यवस्थापन करने वाली संस्था एक्वेरियम ने इसके लिए वॉटर ऑडिट और बैलेंस शीट का कॉन्सेप्ट प्रपोज़ किया है। यह इनोवेटिव स्कीम शुरू में राज्य में पायलट बेसिस पर लागू की जाएगी। मंत्री बावनकुले ने कहा कि यह मीटिंग सीएम देवेंद्र फडणवीस की सलाह पर आयोजित की गई थी।
पानी का कोई रिकॉर्ड नहीं
अभी, ज़मीन के रजिस्ट्रेशन के लिए हर जगह ‘सातबारा’ रिकॉर्ड है, लेकिन पानी के लिए ऐसा कोई रिकॉर्ड सिस्टम नहीं है। पानी को ग्लोबल लेवल पर वह सम्मान और क्वालिटी नहीं मिल रही है जो मिलनी चाहिए। एक बार वॉटर ऑडिट हो जाने के बाद, इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है, इस पर ध्यान दिया जाता है। जब तक पानी के इस्तेमाल को दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक इस पर कोई कंट्रोल नहीं होगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पानी के इस्तेमाल को लेकर लोगों की ज़िम्मेदारी तय हो। इसी मकसद से ‘ब्लू ग्रीन अर्बन डेवलपमेंट’ की तर्ज पर यह ज़रूरी कदम उठाया जा रहा है।
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वॉटर बैलेंस शीट
इस ज़रूरी प्रोजेक्ट के लिए, एक्वेरियम हेड डॉ. सुब्रमण्यम कंसूर, एक्वैरिस्ट डॉ. अविनाश कदम और उदय नायर ने मिलकर ‘वॉटर अकाउंटिंग फ्रेमवर्क’ और ‘वॉटर बैलेंस शीट’ का एक अपडेटेड कॉन्सेप्ट डेवलप किया है। इसके तहत, पानी का तीन स्टेज में ऑडिट किया जाएगा और हर साल इसे क्लासिफ़ाई किया जाएगा। इस सिस्टम से ग्राम पंचायत या वाटरशेड एरिया में पानी के स्टोरेज, इनफ़्लो, आउटफ़्लो और पानी के बैलेंस की एक ट्रांसपेरेंट बैलेंस शीट मेंटेन की जा सकेगी।
सोमवार को मंत्रालय के रेवेन्यू डिपार्टमेंट में हुई मीटिंग में वॉटर सप्लाई और सैनिटेशन डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पराग जैन, रूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी चंद्रकांत पालकुंडवार, वॉटर कंज़र्वेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी जितेंद्र पापड़कर, एक्वेरियम इंस्टीट्यूट के हेड सुब्रमण्य कुसनूर, IIT बॉम्बे के वॉटर स्कॉलर डॉ. अविनाश कदम और इकोनॉमिक स्कॉलर उदय नायर शामिल हुए।
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पानी बचाने वालों को एक्वाक्रेडिट्स
राजस्व मंत्री ने कहा कि इस स्कीम का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इससे न सिर्फ़ पानी को मापा जाएगा, बल्कि पानी बचाने वालों को एक्वाक्रेडिट्स के ज़रिए बढ़ावा भी मिलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में पानी का इस्तेमाल ज़्यादा ज़िम्मेदारी से और ट्रांसपेरेंट होगा। भविष्य में एक बड़ी ‘वॉटर इकॉनमी‘ बनाने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र इस एक्सपेरिमेंट को लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा।
