विदर्भ में ऑपरेशन लोटस की आहट? विधान परिषद चुनाव से पहले कांग्रेस के 60 पार्षद नॉट रिचेबल
Vidhan Parishad Election 2026 से पहले विदर्भ में सियासी हड़कंप! कांग्रेस के 60 से अधिक पार्षद नॉट रिचेबल, विजय वडेट्टीवार ने दी कार्रवाई की चेतावनी। क्या विदर्भ में ऑपरेशन लोटस की तैयारी है?
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Maharashtra Vidhan Parishad Election: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और नॉट रिचेबल वाले ड्रामे की वापसी हो गई है। स्थानीय निकाय संस्थाओं की 17 विधान परिषद सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पूर्व विदर्भ, जो कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, वहां से पार्टी के 60 से अधिक पार्षदों के अचानक ‘लापता’ होने से हड़कंप मच गया है।
विजय वडेट्टीवार की बढ़ी मुश्किलें
पूर्व विदर्भ के भंडारा, गडचिरोली और चंद्रपुर जिलों में कांग्रेस के 300 से अधिक पार्षद हैं। इनमें से 60 पार्षदों का फोन बंद आना या उनसे संपर्क न हो पाना, विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में वडेट्टीवार अपनी बेटी के विवाह समारोह में व्यस्त थे, और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसी मौके का फायदा उठाकर विरोधियों ने दलबदल का खेल शुरू कर दिया है।
पिकनिक पर पार्षद या बीजेपी के संपर्क में?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि ये सभी पार्षद किसी अज्ञात स्थान पर पिकनिक पर गए हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि ये समर्थक बीजेपी विधायक बंटी भांगडिया के संपर्क में हैं। हालांकि, विजय वडेट्टीवार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जो कोई भी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करेगा, उस पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि राज्य में अब दलबदल का उत्सव शुरू हो गया है, जहाँ लोकतंत्र के बजाय धनबल का प्रयोग हो रहा है।
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अरुण लखानी के नाम की चर्चा और बदला समीकरण
बीजेपी की ओर से इस बार उद्योजक अरुण लखानी का नाम काफी चर्चा में है। लखानी की उम्मीदवारी इसलिए भी दिलचस्प हो गई है क्योंकि हाल ही में उनके बेटे का विवाह सांसद सुप्रिया सुले की बेटी के साथ तय हुआ है। इस पारिवारिक संबंध और लखानी की व्यावसायिक पृष्ठभूमि ने चुनाव को राजनीतिक से अधिक रणनीतिक बना दिया है।
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18 जून को परीक्षा, 22 को परिणाम
विधान परिषद की इन 17 सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है और 22 जून को नतीजे घोषित किए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि अभी तक न तो कांग्रेस और न ही बीजेपी ने अपने आधिकारिक उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, लेकिन उससे पहले ही पार्षदों की घेराबंदी शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि इस बार चुनाव में बड़े पैमाने पर आर्थिक व्यवहार और क्रॉस वोटिंग देखने को मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या विजय वडेट्टीवार अपने नाराज और नॉट रिचेबल पार्षदों को वापस लाने में सफल होते हैं, या फिर बीजेपी विदर्भ के इस दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब हो जाएगी।
