MVA की खींचतान से पुणे में भाजपा को मिल सकता है फायदा, रणनीति पर ब्रेक
PMC Election से पहले एमवीए में बड़ी दरार देखने के लिए मिल रही है। कांग्रेस ने अजित पवार गुट से गठबंधन से इनकार किया, जिससे विपक्षी एकता कमजोर और भाजपा को फायदा मिलने की संभावना बढ़ी।
- Written By: अपूर्वा नायक
महाविकास आघाड़ी (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: पुणे मनपा चुनाव के नजदीक आते ही शहर का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां गठबंधन अपनी ताकत आजमाने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर मची रार ने विपक्षी एकता की हवा निकाल दी है।
ताजा घटनाक्रम में, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ किसी भी तरह का चुनावी गठबंधन नहीं करेगी।
इस फैसले ने पुणे में महाविकास आघाड़ी के उन समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, जिन्हें पिछले कई हफ्तों से बुनने की कोशिश की जा रही थी। पिछले कुछ समय से पुणे की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर थी कि चुनावी जीत के लिए राकांपा के दोनों गुटों (शरद पवार और अजित पवार) को एक मंच पर लाया जा सकता है।
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यू-टर्न से स्थानीय नेताओं में नाराजगी
महाविकास आघाड़ी के कई स्थानीय नेत्ता इस रणनीति के पक्ष में थे। लेकिन गुरुवार को मुंबई में हुई प्रदेश कांग्रेस की बैठक के बाद सब कुछ बदल गया। प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानीय नेताओं को आदेश दिया है कि वे अजित पवार गुट से दूरी बनाए रखें।
इस फैसले के बाद आघाड़ी में शामिल घटक दलों के बीच सीट बंटवारे की औपचारिक चर्चा शुरू होने से पहले ही संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेतृत्व के इस अचानक यू-टर्न से स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। नेताओं का तर्क है कि पिछले 15 दिनों से गठबंधन और रणनीति पर जो चर्चाएं चल रही थीं, वे अब बेकार हो गई हैं।
आप व वंचित से परहेज नहीं
वर्तमान स्थिति ऐसी है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे के बीच गठबंधन की चर्चाएं हैं, जबकि कांग्रेस मनसे के साथ जाने के सख्त खिलाफ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस पुणे में ‘एकला चलो रे’ की नीति अपनाते हुए अकेले चुनाव मैदान में उत्तरेगी?
अजीत पवार के साथ गठबंधन को ठुकराने के बाद कांग्रेस ने नए विकल्पों की ओर संकेत दिया है। नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि पार्टी को आम आदमी पार्टी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, वंचित बहुजन आघाड़ी और राष्ट्रीय समाज पक्ष के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए।
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अस्थिरता का मिल सकता है भाजपा को फायदा
महाविकास आघाड़ी की इस उठापटक का सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलता दिख रहा है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों में भ्रम की स्थिति के कारण असंतुष्ट कार्यकर्ता और उम्मीदवार भाजपा का रुख कर सकते हैं। महायुति में भाजपा ने फिलहाल शिंदे गुट की शिवसेना को 16 सीटें देने की तैयारी दिखाई है, जिससे वहां स्थिति काफी हद तक स्पष्ट नजर आ रही है। अजीत पवार गुट के साथ जाने के विरोध में शरद पवार गुट के पुणे शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
