संघर्ष से सफलता का ‘प्रताप’! कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक, जानें प्रताप सरनाईक की पूरी कहानी
Pratap Sarnaik Birthday: 25 अप्रैल को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का जन्मदिन है। एक जमीनी कार्यकर्ता से लेकर राज्य के कैबिनेट मंत्री बनने तक के उनके सफर और सेवा कार्यों की पूरी कहानी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आकाश मसने
मंत्री पद की शपथ लेते प्रताप सरनाईक (फाइल फोटो, सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Transport Minister Pratap Sarnaik Biography: “मैं, उस माटी का वृक्ष नहीं, जिसको नदियों के पानी ने सींचा है। बंजर माटी में पलकर,मैंने मृत्य से जीवन को खींचा है।”
कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तियां उन व्यक्तित्व पर सटीक बैठती हैं, जिन्होंने अपने दशकों के राजनीतिक, सामाजिक जीवन में कठिन संघर्ष से ही सफलता का शंखनाद किया है। इसके उदाहरण कहे जा सकते हैं महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप बाबूराव सरनाईक।
जुझारू कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक का सफर
आम आदमी की समस्याओं और उसके अधिकारों के लिए स्वयं सड़क पर उतर कर उसका हक दिलाने वाले एक कार्यकर्ता से लेकर राज्य के कैबिनेट मंत्री तक का सफर करने वाले प्रताप बाबूराव सरनाईक का जन्म आज ही के दिन यानी 25 अप्रैल 1964 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। युवा अवस्था में सबसे पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़कर लोगों के लिए कार्य करने वाले प्रताप सरनाईक 1997 में पहली बार ठाणे मनपा में नगरसेवक बने। उस समय अपने वार्ड के साथ शहर के लोगों की समस्याओं को मनपा सदन में जोरशोर से उठाने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में सरनाईक ने शासन प्रशासन पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
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वर्ष 2009 में पहली बार ठाणे जिले की ओवला-माजीवाड़ा विधानसभा से शिवसेना के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ा एवं भारी बहुमत से जीतकर राज्य विधानसभा में पहुंचे। उत्कृष्ट विधायी कार्यों के बल ओवला माजीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने इन्हें 2009 से लगातार 4 बार रिकॉर्ड मतों से विधायक बना कर राज्य विधानसभा में भेजा।
विधानसभा के अंदर जाते मंत्री प्रताप सरनाईक
नागरिकों की आशाओं आकांक्षाओं पर खरे उतरते हुए कार्यसम्राट विधायक के रूप में प्रताप सरनाईक ने अनेकों विकास कार्यों के माध्यम से क्षेत्र का कायापलट किया है। 80 प्रतिशत समाजनीति और पर मात्र 20 प्रतिशत राजनीति का धर्म पालने वाले जनप्रिय नेता सरनाईक हमेशा सभी लोगों के दुःख तकलीफ में खड़े नजर आते हैं। हजारों लोगों को इसका साक्षात अनुभव हुआ है।
सीधे बने कैबिनेट मंत्री सरनाईक
2024 में विधानसभा का चुनाव लगातार चौथी बार रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले प्रताप सरनाईक पर विश्वास जताते हुए शिवसेना के मुख्य नेता व डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उन्हें सीधे कैबिनेट में शामिल करते हुए राज्य का परिवहन मंत्री बनाया। राज्य के महत्वपूर्ण परिवहन विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में भी प्रताप सरनाईक उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
काफी कम समय में ही परिवहन मंत्री सरनाईक ने आम यात्रियों के हित में अनेकों निर्णय लेते हुए राज्य के परिवहन महामंडल को भी घाटे से उबारने का प्रयास शुरू किया है। हाल ही में राज्य परिवहन के बेड़े में 3 हजार नई बसें शामिल की गईं हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के कुशल नेतृत्व में राज्य के बस डिपो का विकास, आम यात्रियों को अच्छी सुविधाओं के साथ राज्य परिवहन को नई दिशा देने के साथ सक्षम बनाने का काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मंत्री प्रताप सरनाईक
बालासाहेब के विचारों से हुए प्रेरित
हिंदुह्र्दयसम्राट बालासाहेब ठाकरे एवं स्व. आनंद दिघे के विचारों से प्रेरणा लेते हुए शिवसेना के एकनिष्ठ और वादे पर हमेशा खरे उतरने वाले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सामाजिक कार्यों और हिन्दू संस्कृति को लगातार बढ़ावा देने का कार्य किया है। गाय माता को राज्यमाता का दर्जा देने की सर्वप्रथम मांग विधायक के रूप में प्रताप सरनाईक ने ही की थी और इसकी घोषणा भी तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंद ने की।
धर्म एवं संस्कृति एवं समाज के रक्षक के रूप में सदैव आगे रहने वाले मंत्री अपने प्रताप सरनाईक फाउंडेशन के माध्यम से ठाणे से लेकर मीरा भायंदर तक सांस्कृतिक सामाजिक धार्मिक कार्यक्रम करते रहते है। मीरा भायंदर में शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे आर्ट गैलरी इन्होंने बनवाई। मंत्री सरनाईक की देन है कि आज ठाणे के उपवन तालाब को नया वैभव मिला है। वाराणसी की तर्ज पर घाट, विट्ठल की भव्य दिव्य मूर्ति स्थापित हुई है। पिछले वर्ष देश के सभी शंकराचार्य को एक मंच पर लाकर इन्होंने धर्मजागृति का ऐतिहासिक कार्य किया।
मंत्री सरनाईक के प्रयासों से राज्य का सबसे बड़ा अप्पासाहेब धर्माधिकारी आडोटोरियम वाघबिल में बनने जा रहा है। ओवला माजीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को अयोध्या यात्रा से लेकर तमाम बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन का लाभ उन्होंने दिलवाया है। आज अपने क्षेत्र की हजारों गरीब बहनों को जो लाडली बहिन योजना का जो लाभ मिल रहा है, उसके पीछे भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कैबिनेट मंत्री सरनाईक की इच्छा थी। सर्वप्रथम लाडकी बहनों के लिए यह योजना लागू करने की मांग परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ही की थी।
Pratap Sarnaik: धर्म व समाज के प्रति समर्पित नेता
हिन्दू सभ्यता, संस्कृति, त्योहारों की रक्षा के लिए सरनाईक सदैव आगे रहे हैं। ओवला माजीवाड़ा के उपवन और अन्य तालाबों पर हर साल होने वाली छठ पूजा की व्यवस्था में उनका का बड़ा योगदान रहता है। वे और उनके पुत्र युवा सेना के कार्याध्यक्ष पूर्वेश सरनाईक सपरिवार स्वयं छठव्रतियों के बीच पहुंचकर पूजा पाठ के साथ सभी सुविधा उपलब्ध कराते हैं। यही नहीं बल्कि समस्त हिंदी भाषी समाज के साथ अन्य समाज के लिए भी मुफ्त में समाज भवन बनवाने वाले प्रताप सरनाईक देश के पहले विधायक हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रतिमा भेंट करते मंत्री प्रताप सरनाईक (फाइल फोटो)
घोडबंदर रोड के आनंदनगर में परिवहन मंत्री सरनाईक के प्रयासों से एक साथ 12 समाज के लोगों के लिए अलग अलग भवन बनाने का कार्य हो रहा है। इन योजनाओं के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री व मौजूदा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का पूरा सहयोग परिवहन मंत्री को मिला हुआ है। ओवला माजीवाड़ा क्षेत्र में रहने वाले उत्तरप्रदेश, बिहार व अन्य समाज के गरीब व मध्यमवर्गीय समाज के लोगों को शादी ब्याह और अन्य छोटे मोटे कार्यक्रमों के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्हें मुफ्त में उनके हक का स्थान परिवहन मंत्री सरनाईक के माध्यम से मिलने वाला है।
Pratap Sarnaik: मुसीबत में बने देवदूत!
किसी भी मुसीबत में दौड़ कर मदद करने वाले नेताओं में मंत्री प्रताप सरनाईक (Pratap Sarnaik) का नाम आगे है। कोरोना के समय में जब ठाणे मीरा भायंदर व अन्य इलाके में ज्यादातर रोज कमाने खाने वाले परिवारों के सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया और बीमारी के साथ भुखे मरने की नौबत आ गई उस समय भी सबसे पहले विधायक के रूप में वे देवदूत की तरह दौड़ कर आए। जब अधिकांश नेता लोग डर कर घरों में दुबके बैठे थे, उस कठिन समय में भी विधायक सरनाईक के साथ उनके बेटे पूर्वेश सरनाईक अपने कार्यकर्ताओं के साथ घर घर में राशन पहुंचा रहे थे।
बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचा रहे थे। कोरोना में हजारों गरीब मरीजों को मुफ्त में इंजेक्शन और दवा उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाई। मुफ्त एम्बुलेंस की व्यवस्था की। यहां तक कि कई परिवार में कोरोना से मौत के बाद लोग अपने परिवार के सदस्य की बॉडी लेने के लिए तैयार नहीं थे। ऐसे समय में भी विधायक सरनाईक ने जैसे उन परिवार के सदस्य के रूप में आगे आकर अंतिम संस्कार करवाया। कोरोना में लोगों की जान बचाने के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था, उस संक्रमण के समय में भी जननेता के रूप में सरनाईक ने स्वयं सड़क पर उतर कर कोरोनाकाल में सभी जरूरमन्द नागरिकों के लिए दिन रात कार्य किया।
Pratap Sarnaik: आज वे पूरे महाराष्ट्र के नेता हैं
पिछले साल राज्य के कई जिलों में बेमौसम बरसात के बाद किसानों की फसल यहां तक कि उनके जानवर बह गए। मंत्री प्रताप सरनाईक ने आपदाग्रस्त किसानों की मदद में आगे आकर सैकड़ों किसानों को गाय और आर्थिक मदद उपलब्ध कराया। उनका वह बहुमूल्य योगदान कोई कैसे भुला सकते हैं। सामाजिक,धार्मिक सुविधाओं के साथ नागरिकों के दुख तकलीफ में भाग कर जाने वाले लाडले मंत्री प्रताप सरनाईक का हाथ कोई पकड़ नहीं सकता। उनके समर्थक कहते हैं कि जो काम उन्होंने हांथ में लिया और वादा किया उसे पूरा करके दिखाया है।
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मंत्री बनने से पहले संवेदनशील विधायक के रूप में उनके कार्यों को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के रूप में सम्मानित भी किया था। अब राज्य परिवहन मंत्री के रूप में अपनी उल्लेखनीय भूमिकाओं को लेकर वे चर्चा में रहते हैं। सरकार ने प्रताप सरनाईक को धाराशिव जिले के पालकमंत्री की भी जिम्मेदारी दी है। इसके साथ शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने उनका विशाल जनसंपर्क देखते हुए संगठन विस्तार की दृष्टि से उन्हें अमरावती व अकोला जिलों का संपर्क मंत्री भी बनाया है।
गरीबों-जरूरतमंदों के आंसू पोंछने वाले जननायक की छवि
जाति-पाती या समाज का भेदभाव न करते हुए सभी के दुख तकलीफ में भागकर गरीबों के आंसू पोछने वाले सड़क पर उतर कर जनहित की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय जननायक प्रताप सरनाईक (Pratap Sarnaik) का 25 अप्रैल को जन्मदिन है। कार्यकर्ता से राज्य के चर्चित नेता एवं कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रताप सरनाईक का संघर्ष आसान नहीं रहा है। कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक ने समाजसेवा एवं राजनीति को व्यवसाय नहीं बनाया बल्कि समाजसेवा राजनीति करते हुए अपने परिवार पुत्रों की मदद से व्यवसाय के लिए भी समय निकालकर हाथ बंटाते रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि अपने नाम के अनुरूप कैबिनेट मंत्री सरनाईक कई दशकों के संघर्ष, जिद्द एवं कड़ी मेहनत के बल पर सफलता के ‘प्रताप’ बने हैं।
